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प्राइवेट कंपनी की नौकरी छोड़ अपनाया राजनीति का रास्ता

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पुरोला सीट से नव निर्वाचित विधायक दुर्गेश्वर के सम्मान में जुटे लोग। - फोटो : UTTER KASHI
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पुरोला सीट पर विजय पताका फहराने वाले भाजपा प्रत्याशी दुर्गेश्वर लाल के लिए सफर आसान नहीं था। उन्होंने पांच साल पहले प्राइवेट कंपनी की नौकरी छोड़ राजनीति के माध्यम से जनसेवा का रास्ता चुना। 2017 के विधानसभा चुनाव में वह जन एकता मंच से प्रत्याशी रहे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
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विकासखंड मोरी के ग्राम रेक्चा में 1985 को जन्मे दुर्गेश्वर लाल आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आते हैं। उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद मार्केटिंग में डिप्लोमा किया है। दुर्गेश्वर लाल 14 वर्ष तक दिल्ली की एक कंपनी में ब्रांच मैनेजर रहे। 2017 में इन्होंने राजनीति में कदम रखकर जन एकता मंच से विधानसभा का चुनाव लड़ा था और तीसरे स्थान पर रहे। 2019 में लोकसभा चुनाव के समय दुर्गेश्वर लाल ने भाजपा ज्वाइन की तथा पार्टी ने इन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए हिमाचल प्रदेश की किनौर विधानसभा का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया। दुर्गेश्वर लाल को संघ द्वारा संचालित अभियान राम मंदिर सम्मान निधि का उत्तरकाशी का संयोजक भी बनाया गया था। कांग्रेस विधायक राजकुमार के भाजपा में शामिल होने पर दुर्गेश्वर लाल ने भाजपा छोड़कर 11 नवंबर 2021 को कांग्रेस का दामन थाम लिया था, लेकिन नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले भाजपा ने उन्हें पुन: पार्टी में शामिल कर पुरोला विधानसभा से चुनाव मैदान में उतारकर बड़ा सियासी दांव खेला, जिसमे दुर्गेश्वर लाल सफल रहे।
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