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ज्ञान के खजाने पर चढ़ रही धूल की परतें

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शहर के बीच स्थित गांधी सार्वजनिक वाचनालय एवं पुस्तकालय पर ढाई साल से ताला लटका है। ऐसी स्थिति में यहां मौजूद पुस्तकों का लाभ कोेई नहीं ले पा रहा है।
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वर्ष 1948 में गांधी सार्वजनिक वाचनालय एवं पुस्तकालय की स्थापना स्वर्गीय मंगल सिंह तोमर ने की थी। इसका उद्देश्य गांधी साहित्य के साथ लोगों को किताबें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना था। शहर के बीच में होने के कारण पुस्तकालय में बड़ी संख्या में विद्यार्थी और युवा आते थे। पुस्तकालय की देखरेख का जिम्मा संभालने वाले भैलूड़ा गांव के गजेंद्र गुसाईं के निधन के बाद से इसपर ताले लग गए। नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष रमेश चौहान व जिला व्यापार मंडल के महामंत्री अजय बडोला ने जनहित में इस पुस्तकालय को खोलने की मांग की है। उन्होंने कहा कि व्यापार मंडल के साथ शहर की धार्मिक व सामाजिक संस्थाएं इसके लिए सामूहिक रूप से प्रयास करने को तैयार हैं। उन्होंने पुस्तकालय समिति के मदद मांगने पर हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
पुस्तकालय में हैं 60 हजार से ज्यादा किताबें
इस पुस्तकालय में गांधी साहित्य के साथ विभिन्न विषयों स्वतंत्रता आंदोलन, आजादी के बाद के भारत समेत विभिन्न विषयों पर 60 हजार से अधिक पुस्तकें हैं। कुछ समय पूर्व सांसद निधि से भी पुस्तकालय को 150 से 200 पुस्तकें मिली थी लेकिन पुस्तकालय पर ताला लटके हैं। ऐसे में देखरेख के अभाव में पुस्तकों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
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पुस्तकालय की देखरेख के लिए कोई मानदेय नहीं दिया जाता। निस्वार्थ सेवा के लिए कोई व्यक्ति नहीं मिल पा रहा है। बिना देखरेख के इसकी संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा था। इस कारण इसे बंद करना पड़ा। व्यक्ति के मिलते ही इसे खोला जाएगा।
-शीशपाल पोखरियाल, सचिव गांधी सार्वजनिक वाचनालय एवं पुस्तकालय समिति।
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