नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के म्यूजियम में एक छत के नीचे देवभूमि के अध्यात्म, हिमालय में पर्वतारोहण का रोमांच व गढ़वाल हिमालय की संस्कृति का अनुभव होगा। निम का दावा है कि पूरे देश में यह एकमात्र ऐसा हिमालयन म्यूजियम है, जहां ऑडियो व विजुअल से यहां मौजूद कलाकृतियों का जीवंत आभास होगा।
निम में हिमालयन म्यूजियम का निर्माण वर्ष 2015 में हुआ था। करीब सात से आठ करोड़ की लागत से बने म्यूजियम का निर्माण कार्य वर्ष 2019 के अंत में पूर्ण हो गया था। म्यूजियम में तीन सेक्शन ए, बी व सी बनाए गए हैं। ए व बी सेक्शन में हिमालय क्षेत्र व पर्वतारोहण के रोमांच को दिखाया गया है। ए सेक्शन में आर्टिफिशियल ग्लेशियर बनाया गया है। इसके ऊपर से गुजरते हुए आपको ग्लेशियर पार करने के रोमांच भरा अहसास होगा। इस सेक्शन में पर्वतारोहण से संबंधित छोटी फिल्में भी थ्रीडी के माध्यम से देखने को मिलेंगी। बी सेक्शन में पर्वतारोहण के प्रशिक्षण से संबंधित कलाकृतियां हैं। जबकि सी सेक्शन में हिमालयी क्षेत्र की भवन निर्माण कला, यहां की संस्कृति व चार धामों को दिखाया गया है। म्यूजियम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जब आप म्यूजियम के भीतर बने चारधाम (केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री) के सामने खडे़ होंगे, तो आपको इन धामों में बजने वाली घंटियों की आवाज सुनाई देगी, जिससे आप को वास्तविक रूप से धामों में होने का अहसास होगा। इसके अलावा इस सेक्शन में पहाड़ की पारंपरिक भवन निर्माण शैली, यहां के निवासियों का रहन सहन व संस्कृति को दिखाया गया है। म्यूजियम को पूर्ण रूप से पहाड़ी शैली में बनाया गया है। म्यूजियम निर्माण के स्थानीय पत्थरों का प्रयोग किया गया है। इसके अलावा देवदार की स्थानीय लकड़ी पर बेहतरीन नक्काशी कर म्यूजियम में लगाया गया। पत्थर व लकड़ी के शिल्पकार मोरी व पुरोला क्षेत्र से बुलाए गए थे।
15 से 25 सितंबर के बीच होगा उद्घाटन
म्यूजियम का उद्घाटन 15 से 25 सितंबर के बीच होगा। निम के प्रधानाचार्य कर्नल अमित बिष्ट ने बताया कि उद्धाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हाथों किया जाएगा, जिसके लिए तैयारियां युद्ध स्तर पर की जा रही हैं। म्यूजियम का उद्घाटन वर्ष 2021 में 23 मार्च को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों होना था, लेकिन कोविड-19 की वजह से कार्यक्रम को स्थगित किया गया था।
- म्यूजियम को पूरी तरह पहाड़ी शैली में निर्मित किया गया है। म्यूजियम में आने पर लोगों को यहां के अध्यात्म, पर्वतारोहण का रोमांच व पहाड़ी संस्कृति का वास्तविक आभास हो, इसका प्रयास किया गया है। - कर्नल अमित बिष्ट, प्रधानाचार्य निम।