रवाईं क्षेत्र के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक विकास की धुरी माने जाने वाले दौलत राम रंवाल्टा की याद में पहली बार नौगांव में रवांल्टा कृषि बागवानी एवं सांस्कृतिक मेला आयोजित किया जा रहा है।
जीआईसी नौगांव में होने वाले इस एक दिवसीय मेले का उद्घाटन मुख्यमंत्री हरीश रावत करेंगे। इस मौके पर वह जीआईसी का नाम दौलत राम रंवाल्टा की शिलापट का लोकार्पण भी करेंगे।
जनता की मांग पर सीएम हरीश रावत ने वर्ष 2014 में जीआईसी नौगांव को स्व. दौलतराम रवांल्टा के नाम पर करने की घोषणा की थी।
कोटियाल गांव के एक साधारण परिवार मे 13 सितंबर 1913 को जन्मे दौलत राम रवांल्टा का संघर्षमय जीवन सामाजिक विकास के लिए समर्पित रहा।
दौलत राम रवांल्टा क्षेत्र के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने अपने नाम के आगे से जातिसूचक नौटियाल हटा कर रवांल्टा लिखा था। स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में उनके योगदान को लोग आज भी याद करते हैं।
समाज सेवा के उद्देश्य से उन्होंने दिल्ली जीबी रोड के वेश्यालयों में नारकीय जीवन बिताने के लिए विवश महिलाओं को मुक्ति दिलाने के लिए पहल की और कई महिलाओं को इस घिनौने कृत्य से आजाद करवाया।
1954 में मुराड़ी गांव के समीप विकास खंड की स्थापना करवाई। उन्होंने 1957 मे कालसी से यमुनाघाटी के लिए मोटर मार्ग के प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने के लिए लखनऊ मे 21 दिनों की भूख हड़ताल की।
उनकी भूख हड़ताल के बाद बना मोटर मार्ग आज यमुनोत्री तक जाता है। 1960 मे उत्तरकाशी जनपद को टिहरी गढवाल से पृथक करवाने में उनकी अहम भूमिका रही।
पृथक जनपद बनने के बाद 1966 में जनपद के चार भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ दिल्ली के राजघाट पर 17 दिनों की भूख हड़ताल कर दोषी अधिकारियों को दंडित करवाया।
जीवन पर्यंत समाज सेवा के लिए समर्पित स्व. दौलत राम रवांल्टा की 58 वर्ष की आयु में बीमारी के कारण 14 मार्च 1971 को निधन हो गई। उनका संघर्षमय जीवन आज भी रवाईं क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत है।