उत्तरकाशी में हरिमहाराज के ढोल को मनाने के लिए बैठी पंचों की समिति।
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बाड़ागड्डी पट्टी के आराध्य देव हरिमहाराज व मां खंडद्वारी दत्तात्रेय मंदिर का जीर्णोद्धार न होने से नाराज हैं। रविवार को बाड़ाहाट कू थौलू के तीसरे दिन उनके पश्वाओं ने पंचों के समक्ष अपनी नाराजगी जाहिर की।
कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते लगातार तीसरे वर्ष इस बार भी माघ मेले का आयोजन नहीं हो पाया है, लेकिन पौराणिक व धार्मिक महत्व के चार दिवसीय बाड़ाहाट कू थौलू का आयोजन पहले की तरह ही किया जा रहा है। मकर संक्रांति के दिन से शुरू मेले के तीसरे दिन रविवार को बाड़ागड्डी के आराध्य हरिमहाराज का ढोल, खंडद्वारी माता कुरोली, नागराजा, नाग देवता, हुणेश्वर व शंकर देवता की डोली व निशान भैरव चौक स्थित देवस्थल चमाला की चौंरी पर पहुंचे, जिसके बाद चमाला की चौंरी की परिक्रमा कर देवी-देवताओं की डोली ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। इस दौरान परशुराम मंदिर और अन्नपूर्णा मंदिर के मध्य स्थित दत्तात्रेय मंदिर की लंबे समय से बनी जीर्णशीर्ण स्थिति पर हरिमहाराज व खंडद्वारी माता के पश्वाओं ने नाराजगी जताई। पंचों ने देवी-देवता को मनाने के लिए देवताओं की अगुवाई में मंदिर जीर्णोद्धार के लिए हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। साथ ही जगह को लेकर विवाद की स्थिति बनने पर भूमि का रिकार्ड निकलवाने और कानूनी लड़ाई लड़ने तक की बात कही। इस मौके पर हरिमहाराज की पंच समिति में शामिल थलन गांव के कालेंद्र भट्ट, देवता के पश्वा उत्तम मिश्रा, विजय सिंह, मुंशीराम चौहान, जयप्रकाश, रामनारायण, विक्रम सिंह, शूरवीर राणा, विजेंद्र गुसाईं, गिरीश भट्ट आदि मौजूद रहे।