एक दशक से वीरान पड़े अटल मिनी सचिवालय के भवन में अब लोगों को न्याय मिलेगा। भवन को न्याय विभाग के लिए हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बड़कोट का मुंसिफ न्यायालय अभी तक तहसील परिसर के एक भवन में संचालित हो रहा था।
वर्ष 2010 में बड़कोट में अटल मिनी सचिवालय भवन का निर्माण किया गया था। अटल मिनी सचिवालय का उद्देश्य न्याय पंचायत स्तर पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों की सुलभ मौजूदगी थी, लेकिन एक दशक बाद भी यह भवन अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाया। भवन में आज तक किसी भी विभाग के अधिकारी या कर्मचारी नहीं बैठे। भवन निर्माण के दौरान से ही वीरान पड़ा हुआ था। अब भवन को न्याय विभाग को हस्तांतरित किया जा रहा है। वर्ष 2014 में बड़कोट में मुंसिफ न्यायालय की स्थापना हुई थी, लेकिन अपना भवन न होने के कारण मुंसिफ न्यायालय अभी तक तहसील परिसर के एक भवन में संचालित हो रहा है। स्थानीय प्रशासन, लोनिवि, विद्युत व पेयजल विभाग के अधिकारियों के साथ ही बड़कोट मुंसिफ न्यायालय के न्यायिक अधिकारियों ने भवन का स्थलीय निरीक्षण किया। टीम में शामिल तहसीलदार चमन सिंह ने बताया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट ने भवन को उपयुक्त माना है। लोनिवि विभाग को भवन के सुधारीकरण, विद्युत व पेयजल विभाग को संबधित कार्यों का आगणन तैयार कर विभाग को देेने को कहा है। तहसीलदार चमन सिंह ने कहा कि भवन से लगी 70 नाली भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है। वहीं जिला कल्याण समिति के अध्यक्ष आजाद डिमरी, विशालमणि डिमरी आदि लोगों ने इस निर्णय को सराहा है।