सामाजिक संगठन जय हो ग्रुप ने करीब तीन दशक पहले बने आईटीआई के भवनों का मानकों के विपरीत जीर्णोद्धार कर लीपापोती कर बजट ठिकाने लगाने का आरोप लगाया है। इस संबंध में जिला प्रशासन को पत्र लिखकर मामले की जांच की मांग की गई। इधर, विभागीय अधिकारियों ने मामले को दिखवाने की बात कही है।
वर्ष 1985 में निर्मित आईटीआई के जीर्णशीर्ण भवनों के जीर्णोद्धार के लिए विश्व बैंक से करीब आठ करोड़ मिले हैं, जिसका जिम्मा पेयजल निर्माण निगम को सौंपा गया है। लेकिन कार्य करने की गुणवत्ता व सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर स्थानीय लोगों के साथ आईटीआई प्रशासन ने भी सवाल खड़े किए है। आरोप है कि पुरानी दीवारों पर ही लीपापोती की जा रही है। जीर्णोद्धार के कार्य में लगे मजदूरों को सुरक्षा उपकरण दिए जा रहे हैं, जिसके कारण बीते दिनों दो मजदूर भी चोटिल हो गए थे। आज जय हो ग्रुप ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर भारी भरकम राशि के दुरुपयोग की आशंका जताई है। आईटीआई के मुखिया निरंजन कुमार ने बताया कि उन्होंने भी कार्य करने की गुणवत्ता, सुरक्षात्मक आदि पर सवाल खड़े कर अधिकारियों को लिखा है। इधर, निगम के सहायक अभियंता एमएस पंवार ने कहा कि वह इसे दिखवाएंगे। लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन को पत्र भेजने वालों में सुनील थपलियाल, मोहित अग्रवाल, मोहित अग्रवाल, विनोद बिष्ट, अजय रावत आदि रहे।