उत्तरकाशी। अमर उजाला के अपराजिता अभियान के तहत कमद गांव में गोष्ठी का आयोजन किया गया। हिमालय पर्यावरण जड़ी बूटी एग्रो संस्थान (जाड़ी) के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में ‘नशे के सामाजिक दुष्प्रभाव’ विषय पर चर्चा की गई। महिलाओं ने शराब बंदी की मांग उठाते हुए नशे के खिलाफ आंदोलन का एलान किया।
कमद गांव में नालेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में अपराजिता अभियान के तहत गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें महिलाओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी संसाधन विकसित करने के बजाए सरकार द्वारा शराब के ठेके खोले जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि धौंतरी में शराब का ठेका खुलने से पूर्व क्षेत्र में कम लोग ही नशे का सेवन करते थे, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़ गई है। ऐसे में अगर सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों का विकास करना है, तो उसे सबसे पहले शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना चाहिए। बैठक में महिलाओं ने पर्यटन आधारित रोजगार व संचार सेवाओं को विकसित करने की मांग की। जाड़ी संस्था के सचिव द्वारिका सेमवाल ने महिलाओं को बीज बम अभियान के साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। इस मौके पर प्रियंका देवी, सोना देवी, प्रमिला देवी, गौरा देवी, मीनाक्षी देवी, संगीता देवी, रामप्यारी देवी, इंदिरा देवी, सुषमा देवी, मीना देवी, पूरणमासी देवी, भागेश्वरी देवी, पवना देवी, जगदंबा देवी, गोंफुली देवी, चैता देवी, कंचना देवी, कृष्णा देवी, फूलमाला देवी, राजी देवी आदि मौजूद रहे।
शराब के बढ़ते प्रचलन के कारण ग्रामीण महिलाओं को घरेलू हिंसा, आर्थिक तंगी आदि दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसे देखते हुए सरकार को शराब की ब्रिकी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना चाहिए।
केदारी देवी, अध्यक्ष नालेश्वर महादेव स्वयं सहायता समूह, कमद गांव।
कमद क्षेत्र में मौजूद बुग्यालों व दुर्लभ वन संपदा के चलते पर्यटन की अपार संभावना है। ऐसे में अगर शासन प्रशासन द्वारा इस संबंध में सकारात्मक कार्रवाई की जाए, तो ग्रामीणों के लिए पर्यटन आधारित रोजगार के द्वार खुल सकते हैं।
संतोषी देवी, अध्यक्ष ज्वाल्पा देवी समिति, कमद।