सरकार अल्पमत में है या नहीं, अब यह झगड़ा राजभवन पहुंच गया है। रिपोर्ट राज्यपाल के पास चली गई है। देर रात्रि विपक्ष ने दावा पेश कर राजनीतिक पारा बढ़ा दिया।
अब राज्यपाल के पास संवैधानिक तौर पर दो विकल्प हैं। एक सरकार को बहुमत साबित करने को कहे और दूसरा केंद्र को रिपोर्ट भेजकर राज्य में गवर्नर रूल की सिफारिश कर दें।
सदन से बाहर सरकार का सारा मामला अब राज्यपाल के हाथ में आ गया है। राज्यपाल का अगला कदम क्या होगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
राज्यपाल क्या करेंगे, इस बात की जानकारी तो नहीं किसी के पास नहीं है, लेकिन कुल मिलाकर दो ही विकल्प नजर आ रहे हैं।
मुख्यमंत्री को करना होगा बहुमत साबित:
एक तो हरीश रावत को तय समय में बहुमत साबित करने को कहें। इसके लिए सदन का सत्र बुलाना होगा, जिसमें फिर से हंगामे के आसार बनेंगे।
चूंकि हरीश रावत अभी मुख्यमंत्री हैं, इसलिए फिलहाल भाजपा या किसी दूसरे राजनीतिक दल को तब तक सरकार बनाने का मौका मिलने की संभावना नहीं बनेगी, जब तक हरीश की सरकार संवैधानिक प्रावधानों के तहत बहुमत न खो दें।