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निचली अदालत के सजा के फैसले को तृतीय एडीजे ने पलटा

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काशीपुर। तृतीय एडीजे ने सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत के मामले में अवर न्यायालय की ओर से सजा के आदेश को निरस्त करते हुए आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। इस मामले में अवर न्यायालय ने आरोपी को डेढ़ वर्ष की सजा और चार हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
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बाजपुर निवासी देव सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका भतीजा इंदर सिंह 15/16 मई, 2013 की रात ग्राम मदनापुर में शादी में शामिल होकर बाइक से ग्राम राधाकान्तपुर लौट रहा था।
खटोला पुल के पास पिकअप चालक ने उसके भतीजे की बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में गंभीर रूप से घायल को सरकारी अस्पताल दिनेशपुर ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
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पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर बाजपुर के ग्राम बन्नाखेड़ा निवासी हरदेव सिंह उर्फ देवा के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश की। इस मुकदमे का परीक्षण काशीपुर की अदालत में हुआ।
अदालत ने 29 मार्च 2017 को धारा 279 में आरोपी हरदेव को छह महीने की सजा और एक हजार रुपये का जुर्माना, धारा 304 ए में आरोपी को डेढ़ वर्ष की सजा और चार हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
सजा के खिलाफ हरदेव ने जिला सत्र न्यायालय में अपील की। दोनों पक्षों ने अदालत में अपने-अपने तर्क रखे। अपील पर सुनवाई करते हुए तृतीय एडीजे रजनी शुक्ला ने निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।
मारपीट के आरोपी साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त
काशीपुर। मारपीट कर धमकाने के आरोपियों को कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
कुुंडा थाने के ग्राम मिस्सरवाला निवासी आसिफ ने 27 अगस्त, 2015 को न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में परिवाद दायर किया था कि उसका अपने गांव के ही जावेद से विवाद हुआ था। शिकायत पर पुलिस ने जावेद को मंडी चौकी बुलाया था लेकिन एक ग्राम प्रधान की मध्यस्थता के बाद उसे बगैर कार्रवाई के छोड़ दिया गया।
आरोप है कि 21 जुलाई 2015 को रात 11 बजे वह अपने घर से बाहर मोबाइल पर बात कर रहा था, तभी ग्राम प्रधान तसलीम के साथ जावेद, इंतजार, आसिफ और नवाब ने एकराय होकर उस पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया। परिवाद पर सुनवाई कर अदालत ने सात अक्तूबर को सभी आरोपियों को कोर्ट में तलब किया।
वाद का परीक्षण न्यायिक मजिस्ट्रेट रमेश चंद्र की अदालत में हुआ। बचाव पक्ष की ओर से पैरवी अधिवक्ता धर्मेंद्र तुली ने की। दोनों पक्षों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन कर अदालत ने सभी आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
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