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घर टूटा तो रिश्तेदारों ने मुंह मोड़ा: जमींदोज आशियानों के मलबे से ईंट-सरिया निकालने में जुटे लोग, जानें हाल

Mon, 15 Jul 2024 02:34 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर

सार

नेशनल हाइवे किनारे बुलडोजर से जमींदोज हुए 46 घरों का मलबा बिखरा पड़ा है। कभी बच्चों की उछल-कूद से रौनक होने वाले स्थान अब मलबे के ढेर पड़े हैं। दिल पर पत्थर रखकर कुछ लोग मलबा से ईंट और सरिया निकालकर ले जा रहे हैं।
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घर टूटा तो रिश्तेदारों ने मुंह मोड़ा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यहीं पर सारे चमन की बहार थी कल तक, पड़ी है आज जहां खाक आशियाने की...ये चंद लाइन भगवानपुर कोलड़िया में अतिक्रमण के नाम पर उजाड़ी गई बसावट पर सटीक बैठती है। नेशनल हाइवे किनारे बुलडोजर से जमींदोज हुए 46 घरों का मलबा बिखरा पड़ा है। कभी बच्चों की उछल-कूद से रौनक होने वाले स्थान अब मलबे के ढेर पड़े हैं। दिल पर पत्थर रखकर कुछ लोग मलबा से ईंट और सरिया निकालकर ले जा रहे हैं। इस समय उनके लिए भूख प्यास से कहीं ज्यादा ईंट-सरिया के ज्यादा मायने हैं।

भगवानपुर कोलड़िया में जहां शनिवार को घरों पर सात बुलडोजरों के गरजने के साथ ही लोगों चित्कारें गूंज रही थी, वहीं रविवार दोपहर मलबा के ढेर से पटे पूरे इलाके में दो जेसीबी से ट्रालियों में मलबा भरने की आवाज ही सुनाई दे रही थी। एक जेसीबी लोनिवि की थी और एक जेसीबी किसी ग्रामीण ने मंगवाई थी। कुछ परिवार ऐसे थे, जो कड़ी धूप की परवाह किए बगैर नए आशियाने के लिए मलबे से काम की ईंट और सरिया निकाल रहे थे। इनमें महिला, पुरुष के साथ-साथ बच्चे भी शामिल थे। अपने आशियाने खोने का दुख लिए लोग आंसुओं के सैलाब के बीच खामोशी से काम में लगे थे। सिर्फ अपनी किस्मत को कोस रहे लोगों ने बात करने से इन्कार कर दिया। बेहद दुखी भरे लहजे में महिला बोली कि हमारी फोटो मत खींचिए। हमें हमारे हाल पर छोड़ दीजिए। हमारा आशियाना हमसे छिन गया, बच्चों के साथ सड़क पर आ गए। अब कुछ कहकर क्या बदलने वाला है।

एक जेसीबी और दो ट्राॅलिया मलबा उठाने को लगाई गई हैं। जिन ग्रामीणों ने मलबा ले जाने की मांग की थी, उनको मलबा ले जाने दिया जा रहा है। पूरा मलबा हटाने में दो दिन का वक्त लगेगा। इसे बाद जमीन की हदबंदी की जाएगी।

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- ओमपाल सिंह, ईई, लोक निर्माण विभाग

घर टूटा तो रिश्तेदारों ने भी मुंह मोड़ा
भगवानपुर कोलड़िया में आशियाना टूटने के बाद कड़ी धूप में मलबे से ईंट निकाल रहा एक ग्रामीण फफक पड़ा। रूंधे गले से उसने कहा कि घर टूटने से पहले तक कुछ दूरी पर रहने वाले रिश्तेदारों का खूब आना-जाना था। घर छीनने के बाद अब रिश्तेदारों ने भी मुंह मोड़ लिया है। उनके साथ सिस्टम ने अन्याय तो किया ही, रिश्तेदारोें ने भी मदद से हाथ पीछे खींच लिए। घर तोड़कर बची ईंटें समेट रहे हैं, ताकि कहीं जगह मिले तो घर बनाने के लिए काम में आ सके। ब्यूरो

बेघर हुए परिवारों को पट्टे देकर बसाए जिला प्रशासन
भगवानपुर कोलड़िया में अतिक्रमण के नाम पर हटाए गए 46 परिवारों को पुनर्वास की मांग हो रही है। पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने कहा कि इन परिवार को ग्राम सभा की निप्रयोज्य जमीन पर प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के तहत आवासीय पट्टे देकर बसाया जाना चाहिए। उन्होंने इस संबंध में डीएम से वार्ता की है। कहा कि उनके कार्यकाल में आनंदखेड़ा और कंटोपा से 100 से अधिक लोगों को हटाया गया था। कंटोपा से हटाए गए लोगों को संपतपुर गांव में आवासीय पट्टे देकर बसाया गया। विधायक निधि से इन लोगों की सहूलियत के सड़कें बनवाई थीं और विद्युतीकरण का कार्य कराया था। इसी तरह से आनंदखेड़ा से हटाए गए लोगों को मकरंदपुर रोड पर आवासीय पट्टे देकर बसाया गया था। इसी तर्ज पर भगवानपुर कोलड़िया के ग्रामीणों को पट्टे दिए जाने चाहिए।

मौके पर पड़ा है कुछ परिवारों का सामान

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भगवानपुर कोलड़िया में कुछ परिवार ऐसे हैं, जो व्यवस्था नहीं होने की वजह से अपना सामान नहीं ले सके हैं। उन्होंने मौके पर ट्राॅली या जमीन पर तिरपाल से ढककर सामान रखा हुआ है। उनके लिए खाने पीने के लाले पड़े हुए हैं। छोटे बच्चों के लिए दूध का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। कुछ लोगों ने तिरपाल जरूर दिए हैं, जो बारिश व धूप से बचने के काम आ रहा है। लोग कहते हैं कि यह उनके लिए आपदा ही है। कम से कम मानवीय पहलु दिखाकर अस्थायी व्यवस्था की जानी चाहिए थी। 

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