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23 साल में 21 हाथी गवां चुके हैं जान: हाथियों को ट्रेन की चपेट में आने से रोकेगी आईडीएस तकनीक, जानिए कैसे

Wed, 22 Nov 2023 05:09 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर

सार

लालकुआं-गुलरभोज और लालकुआं-रुद्रपुर रेलवे ट्रैक पर शीघ्र ही आईडीएस (इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम) का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीक से हाथियों को ट्रेनों की चपेट में आने से बचाया जा सकेगा। 
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हाथी - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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वन्य जीवों के लिए चिह्नित संवेदनशील 100 रेलवे ट्रेक में शामिल लालकुआं-गुलरभोज और लालकुआं-रुद्रपुर रेलवे ट्रैक पर शीघ्र ही आईडीएस (इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम) का इस्तेमाल किया जाएगा। 
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इस तकनीक से हाथियों को ट्रेनों की चपेट में आने से बचाया जा सकेगा। हाथियों के रेलवे ट्रैक के आसपास होने से आईडीएस के माध्यम कंपन होने पर नजदीकी रेलवे स्टेशन अथवा हॉल्ट के कर्मचारी अलर्ट हो जाएंगे। लालकुआं-गूलरभोज और लालकुआं-रुद्रपुर रेलवे ट्रैकों पर भी अक्सर हाथियों की मौत की घटनाएं सामने आने से इसे संवेदनशील ट्रैक के रूप में चिह्नित किया गया है। 

इस कारण वन विभाग हाथियाें की आवाजाही रोकने के लिए अंडरपास और फ्लाईओवर बनाने की तैयारी कर रहा है। इन जगहों पर रेलवे की सबसे आधुनिक तकनीक आईडीएस का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे रेलवे ट्रैक के पास आने वाले हाथियों का पता लगाने में मदद मिलेगी। यहां से स्थानीय लोको पायलट, स्टेशन मास्टर, स्टेशन अधीक्षक को भी अलर्ट भेजा जाएगा। इससे ट्रैक के आसपास हाथी के होने का पता चल जाएगा। 
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23 साल में 21 हाथी गवां चुके हैं जान
राज्य गठन के बाद उत्तराखंड में अब तक 21 हाथी ट्रेन की चपेट में आकर जान गवां चुके हैैं। हाथियों का झुंड अक्सर रेलवे ट्रैक व हाईवे को पार करता रहता है। कई बार हाथी दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। पूर्व में हुई दुर्घटनाओं के बाद रेल विभाग और वन विभाग के बीच रात्रि के समय गूलरभोज, बरेली व हल्द्वानी मार्ग पर धीमी गति से रेल गाड़ी चलाने पर समझौता हुआ था। इसके बावजूद भी दुर्घटनाएं हो रही हैं। 

लालकुआं-गूलरभोज और लालकुआं-रुद्रपुर दोनों रेलवे ट्रैक हाथियों के लिए संवेदनशील हैं। इन जगहों पर आईडीएस तकनीक से हाथियों के आने की सूचना पहले ही रेलवे विभाग को मिल जाएगाी। इन स्थानों पर अंडरपास बनाने की भी तैयारी है। - हिमांशु बागड़ी, डीएफओ तराई केंद्रीय वन प्रभाग।
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