किच्छा में पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने विधायक तिलक राज बेहड़ के मलसा बूथ पर हुई हार की नैतिक जिम्मेदारी लेने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नैतिक जिम्मेदारी लेना तब माना जाता है जब वह व्यक्ति अपने पद से इस्तीफा दे।
किच्छा विधानसभा के बूथ 80 की हार की जिम्मेदारी नहीं ली जहां उनका कार्यालय और परिवार सहित वोट है। यहां उन्हें 101 मत मिले और बीजेपी को 431 मत मिले, विधानसभा में ढाई वर्ष में ही कांग्रेस व बेहड़ से जनता का मोह भंग हो गया है। 160 बूथों में से 98 पर कांग्रेस की हार हुई है।
शुक्ला ने कहा कि 2022 में करीब 10,000 वोटों से पिछड़ी भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं के दम पर और नरेंद्र मोदी व पुष्कर सिंह धामी के कुशल विजन एवं गुड गवर्नेंस के दम पर जबरदस्त वापसी की है। उत्तराखंड की पांचों सीटें भारी अंतर से जीताकर जनता ने धामी सरकार के ढाई वर्ष के कार्यकाल को 100 नंबर दिए। कहा कि लगातार तीसरी बार (हैट्रिक) पांच सांसद देकर पीएम मोदी के विजन पर पूरा भरोसा जताया है।
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उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि पूरी दुनिया में भारतीय लोकतंत्र एवं चुनाव प्रणाली की निष्पक्षता की सराहना होती है परंतु लगातार हार रहे विपक्ष ने लोकतंत्र को कलंकित करते हुए गिनती से पूर्व ईवीएम पर ही भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और इस बार भी चुनाव परिणाम में जब उनकी सीट कुछ प्रांतों में अधिक आई तो निर्लज्जता से जश्न मना रहे हैं। इस तरह 160 में से करीब 100 बूथों पर भाजपा की जीत हुई है। इसमें मेरा आवास विकास का बूथ नंबर 84 भी है जहां हमने कांग्रेस को 409 मतों से हराया उन्हें 126 तथा भाजपा को 535 मत मिले।
शुक्ला ने कहा कि बेहड़ के मुंह से नैतिकता की बात अच्छी नहीं लगती और न ही उन्हें नैतिक जिम्मेदारी का पता है यदि वास्तव में वे नैतिक जिम्मेदारी ले रहे हैं तो उन्हें इस्तीफा देकर पुनः जनादेश लेना चाहिए। अपने पुत्र को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर विधायक प्रतिनिधि बनाने से कांग्रेस के कार्यकर्ता भी निराश हैं। कहा कि आने वाले नगर निकाय, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव और सहकारिता के चुनाव के लिए कार्यकर्ता इस जीत से उत्साहित होकर और अधिक ऊर्जा से भाजपा का परचम लहराएंगे।