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Uttarakhand News: विदेशी फल ब्लूबेरी की अब ऊधमसिंह नगर में भी खेती, बाजार में एक हजार रुपये किलो है कीमत

Mon, 02 Sep 2024 10:18 AM IST
हीरा मेहरा मो. यामीन अंसारी, संवाद

सार

विदेशी फल ब्लूबेरी की अब उत्तराखंड में भी खेती होने लगी है। तराई क्षेत्र केे एक छोटे से गांव में पौधों को पॉली हाउस में लगाया गया है जहां ब्लूबेरी की नर्सरी अब पेड़ का रूप लेने लगी है। 
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विदेशी फल ब्लूबेरी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विदेशी फल ब्लूबेरी की अब उत्तराखंड में भी खेती होने लगी है। तराई क्षेत्र केे एक छोटे से गांव में पौधों को पॉली हाउस में लगाया गया है जहां ब्लूबेरी की नर्सरी अब पेड़ का रूप लेने लगी है। इस साल मार्च-अप्रैल के महीनाें में पेड़ों पर ब्लूबेरी फल देखने को भी मिले। हालांकि, अभी यह पूरी तरह तैयार नहीं हो सकी है लेकिन फार्मिंग कंपनी की ओर से इसकी खेती को करने के लिए कसरत की जा रही है।

प्रदेश के तराई क्षेत्र धान, गेहूं व गन्ने की खेती के लिए जाना जाता है लेकिन अब अनाज की खेती के साथ-साथ किसान अपने खेतों में विदेशी फलों के बाग-बगीचे व पॉली हाउस में सुपर फूड की खेती की ओर रूचि लेने लगे हैं। सुपर फूड में से ही एक अमेरिकन ब्लूबेरी फल है।

भारत में अमेरिका से ब्लूबेरी आयात किया जाता है लेकिन अब इसकी खेती उत्तराखंड में भी होने लगी है। मॉडर्न और वैज्ञानिक विधि से होने वाली इसकी फार्मिंग को एक निजी कंपनी की ओर से किया जा रहा है। पौधों पर आने वाले फल जल्द ही मैट्रोसिटी के बाजारों में उपलब्ध होंगे।

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मुख्य उद्यान अधिकारी ने बताया कि मखवारा फार्म में किसान की ओर से साल 2022 में करीब 33 एकड़ जमीन एक एग्रो कंपनी को बागवानी के लिए दी गई है। इस खेतीहर भूमि पर कंपनी की ओर से ब्लूबेरी की खेती की जा रही है। ब्लूबेरी फल बेहद महंगा है। जो एक हजार रुपये किलो या उससे अधिक दामों पर बिकता है। ब्लूबेरी फल के सेवन से कई सारे विटामिन्स और पोषक तत्वों की पूर्ति होती है। संवाद

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फरवरी-मार्च के महीने से टूटता है फल
अप्रैल और मई महीने के दौरान ब्लूबेरी के पौधों की रोपाई की जाती है। फरवरी-मार्च से फल टूटना शुरू हो जाता है जोकि जून तक जारी रहता है। वहीं, मानसून के आगमन के बाद ब्लूबेरी के पौधों की छंटाई की जाती है। छंटाई करने के दो से तीन महीने बाद सितंबर-अक्तूबर तक उसमें शाखाएं आने लगती हैं और फूल लगने शुरू भी हो जाते हैं। हर साल ब्लूबेरी के पौधे की छंटाई करने से उसकी उत्पादन क्षमता बढ़ती जाती है। पूर्व सीएचओ भावना जोशी खेती का निरीक्षण कर चुकी हैं।
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उत्तराखंड में पहली बार ब्लूबेरी की खेती जिले के मखवारा फार्म गांव में हो रही है। एक निजी एग्रो कंपनी की ओर से निजी तरीके से ब्लूबेरी की खेती की जा रही है। यहां पॉली हाउस व नेट हाउस की मदद से ब्लूबेरी के पौधे लगाए गए हैं। अमेरिकन फल होने की वजह से इसका भारत में आयात होता है। सुपरफूड से मुनाफे को देखते हुए किसान अब बागवानी की तरफ रुख करने लगे हैं।
-प्रभाकर सिंह, मुख्य उद्यान अधिकारी

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