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आईआईएम में लगी विश्व स्तरीय 10 हजार पुस्तकों की प्रदर्शनी

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आईआईएम में पुस्तक प्रदर्शनी में मौजूद पुस्तक प्रेमी। - फोटो : KASHIPUR
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काशीपुर। भले ही लोगों ने लॉकडाउन को स्वयं भुगता हो लेकिन मन में अब भी लॉकडाउन के विषय में और गहराई से जानने की उत्सुकता है। शुक्रवार को आईआईएम में लगी पुस्तक प्रदर्शनी में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों से लेकर आम नागरिकों तक ने अलग-अलग देशों के लॉकडाउन पर लिखीं किताबों को खूब पसंद किया। इसी तरह लोगों के जीवन से जुड़ी किताबों को भी पसंद किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने किताबों को खरीदा भी।
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में शुक्रवार को विश्व स्तरीय प्रकाशकों की दस हजार पुस्तकों की प्रदर्शनी लगाई गई। इस दौरान छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को बीते दो वर्षों के दौरान पूरी दुनिया में प्रकाशित हुईं पुस्तकों को देखने और उन्हें खरीदने का अवसर मिला। चुनी गईं पुस्तकों को आईआईएम की लाइब्रेरी में रखा जाएगा और यह पुस्तकें भविष्य में छात्रों और पुस्तक प्रेमियों के काम आएंगी। कोरोना संक्रमण कम होने के साथ बढ़ते स्क्रीन टाइम से होने वाली दिक्कतों को देखते हुए आईआईएम काशीपुर ने विद्यार्थियों के बौद्धिक स्तर को बढ़ाने और पुस्तकों के प्रति रुचि पैदा करने का प्रयास किया है। इसी के तहत शुक्रवार को अकादमिक ब्लॉक में पुस्तकों की प्रदर्शनी लगाई गई।
आईआईएम लाइब्रेरी के चेयरपर्सन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कुणाल ने बताया कि प्रदर्शनी में विश्व के सभी प्रतिष्ठित प्रकाशकों की पुस्तकें मौजूद हैं। इनमें टेलर फ्रांसिस, ब्लूम्सबरी, सेज, सिंएज, वाइल्ड इंडिया सहित विश्व के तमाम प्रकाशकों की पुस्तकें शामिल हैं। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी से करीब 20 लाख रुपये की पुस्तकें आईआईएम खरीदेगा। इसके बाद इन्हें आईआईएम की लाइब्रेरी में रखा जाएगा। समय-समय पर यह पुस्तकें स्टूडेंट्स को एलॉट कर दी जाएंगी।
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किताबों को जिंदगी से हटाना असंभव
काशीपुर। रात भर चलती रहती हैं उंगलियां मोबाइल पर, किताब सीने पे रख कर सोये हुए जमाना हो गया। यही आज का सच है और हर शख्स रात भर मोबाइल फोन देखकर अगले दिन आंखों से बहते पानी और सिर दर्द से परेशान है। इसकी वजह स्मार्ट फोन है जो धीरे-धीरे लोगों की जिंदगी की जरूरत के साथ ही अब मुसीबत का सबब बनने लगा है। यही वजह है कि अब लोग आंखों को आराम देने के लिए प्रिंट की ओर लौट रहे हैं।
आईआईएम की पुस्तक प्रदर्शनी में पुस्तक प्रेमियों ने कहा जीवन से किताबों को हटाना असंभव है। कोरोनाकाल में स्क्रीन टाइम बढ़ा है। शिक्षक और विद्यार्थी ऑनलाइन क्लासेस में 14-14 घंटे मोबाइल लेपटॉप को देने लगे हैं। इसके चलते सेहत पर प्रतिकूल असर पर पड़ रहा है। सबसे ज्यादा मार आंखों पर पड़ रही है। आंखों की रोशनी धीरे-धीरे साथ छोड़ने लगी है। मोबाइल या कंप्यूटर पर समय देने से आंखें ड्राई हो रही हैं। कई लोग तो ऑपरेशन की कगार पर पहुंचे चुके हैं। अगर कोई यह सोचता है कि वह पुस्तकों को जीवन से हटाकर कार्य कर सकता है तो यह मिथक है। अब लोग डिजिटल के दुष्परिणाम जाकर वापस प्रिंट की ओर लौट रहे हैं।
प्रिंट को वरीयता दें और आंखें बचाएं...
प्रदर्शनी के दौरान वक्ताओं ने कहा कि स्क्रीन पर 12-14 घंटे समय देने का सबसे बड़ा नुकसान आंखों को होता है। धीरे-धीरे आंखें खराब होने लगती हैं। इससे बचने का सबसे सही तरीका है कि पुस्तकों को वरीयता दी जाए। पुस्तकें ज्ञान बढ़ाने में सहायक हैं और इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने या बिजली चले जाने पर भी आप पुस्तक पढ़ सकते हैं। ऑनलाइन अगर आप कुछ भी खरीदते हैं तो उसे पढ़ने के लिए आपको एक सीमित समय मिलता है जबकि पुस्तक जब चाहें तब पढ़ सकते हैं।
आज हम भले ही किताबें डिजिटल से पढ़ रहे हों, लेकिन पढ़ने का आनंद किताब से ही आता है। घर में रखी एक किताब पूरा परिवार पढ़ सकता है, लेकिन डिजिटल माध्यम से ऐसा करना आसान नहीं है।
- डॉ. केएम बहारुल इस्लाम।- प्रोफेसर।
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पुस्तकें पढ़ना जरूरी है क्योंकि हमारी आंखें कंप्यूटर-मोबाइल की रोशनी बर्दाश्त नहीं कर पाती हैं और खराब होने लगती हैं। मेरी स्वयं की आंखों का ऑपरेशन हो चुका है। आंखों को सुरक्षित रखने के लिए पुस्तकों का इस्तेमाल बेहतर तरीका है।
-डॉ. कुणाल, असिस्टेंट प्रोफेसर।
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कोरोनाकाल में स्क्रीन टाइम शिक्षक और विद्यार्थी दोनों का बढ़ गया है। आम लोगों ने भी स्क्रीन पर खूब समय दिया है। ऐसे में उन्हें बीमारियों ने घेरना शुरू कर दिया है। इससे बचने के लिए हमें स्क्रीन टाइम कम करना होगा। -डॉ. आसिफ खान, लाइब्रेरियन
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जब हम डिजिटल पर पढ़ाई करते तो हमारे मोबाइल या कंप्यूटर पर व्हाट्सएप पर मैसेज आने से ध्यान भंग होता है। कई बार हम बीच-बीच में यूट्यूब आदि चलाने लगते हैं और पढ़ाई बंद कर देते हैं। जबकि पुस्तकों के मामले में ऐसा नहीं है।- गौतम गुलाटी
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किताबें पढ़ना डिजिटल की अपेक्षा काफी बेहतर विकल्प है। ऑनलाइन पढ़ने के कई दुष्परिणाम हैं, जबकि किताबें पढ़ना सुरक्षित है।- तनुश्री
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डिजिटल में हम पहले सोचते हैं कि क्या पढ़ना है और फिर सर्च करते हैं, जबकि पुस्तकों के मामले में ऐसा नहीं है। एक से बढ़कर एक किताबें उपलब्ध हैं, उनमें से आप बेहतर से बेहतर किताब खरीद सकते हैं।- निखिल भार्गव।
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