चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे कई दावेदारों की राह में उनकी संतान ही आड़े आ गई है। निकाय चुनाव में दो से अधिक बच्चे वाले प्रत्याशी किसी भी पद के लिए नामांकन नहीं भर पाएंगे। बाकायदा इसके लिए प्रत्याशियों को नामांकन फार्म के साथ दो से अधिक बच्चे नहीं होने का शपथ पत्र भी देना होगा।
जांच में शपथ पत्र गलत पाए जाने पर प्रत्याशी को जेल भी हो सकती है। नामांकन प्रक्रिया के पहले दिन दो से अधिक बच्चे होने के कारण कई लोगों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा।
चुनावी समीकरण कब और कैसे गड़बड़ा जाएं, इसका पता नहीं चलता। निकाय चुनाव में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। चुनाव आयोग ने निकाय चुनाव में प्रत्याशियों के लिए बच्चों का मानक लागू कर दिया है। दो से अधिक बच्चों के मां एवं बाप चुनाव लड़ने से बाहर हो गए हैं।
रुद्रपुर में पार्षद का चुनाव लड़ने का मन बना चुके खेड़ा वार्ड नंबर पांच से एक संभावित दावेदार ने बताया कि उन्हें पूरी उम्मीद थी कि पार्टी टिकट देगी और जनता का सहयोग भी मिलेगा।
पर क्या करें उनके तीसरे बच्चे का जन्म अप्रैल 2003 के बाद होने से उनका चुनाव लड़ने का सपना अधूरा रह गया है। इसी तरह नामांकन कक्ष में भी तमाम संभावित दावेदार तीसरे बच्चे संबंधी नियम से अचरज में पड़ गए। कई दावेदारों को तो बिना नामांकन पत्र खरीदे लौटना पड़ा।
यह है प्रावधान
रिटर्निंग आफिसर आरडी पालीवाल के मुताबिक चुनाव आयोग के नियम की धारा 13 (घ) संशोधन अध्यादेश 225 और अधिनियम अधिसूचना 455 के अनुसार यदि निकाय चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी का तीसरा बच्चा 27 अप्रैल 2003 के बाद पैदा हुआ है तो ऐसी दशा में वह चुनाव नहीं लड़ सकता। यह आदेश दो जुलाई 2002 से लागू है।
रिटर्निंग आफिसर के मुताबिक इसके लिए प्रत्याशियों को शपथ पत्र देना होगा। इसकी जांच भी की जाएगी। यदि कोई गलत शपथ पत्र देकर नामांकन भरता है तो उसका नामांकन रद्द कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा।