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केदारघाटी में उठाने लायक नहीं रहे शव

Sun, 07 Jul 2013 10:44 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
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16-17 को जलप्रलय का शिकार हुए लोगों के शवों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था शासन नहीं कर पा रहा है। बड़ी संख्या में शव मलबे में दबे हैं, उन्हें निकालकर अंतिम संस्कार करने में मौसम आड़े आ रहा है। अब तक कुछ शवों का ही दाह संस्कार हो पाया है।
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ऐसी स्थिति में क्षत-विक्षत हो रहे शवों पर चूना डाला जा रहा है। कार्यवाहक महानिदेशक चिकित्सा डॉ जेएस जोशी का कहना है कि अभी तक 112 बैग चूना प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया है। इसके साथ ही ब्लीचिंग पाउडर भी भेजा जा रहा है।
केदारघाटी में शवों की स्थिति प्रतिदिन बिगड़ रही है।

एक-दूसरे से चिपके शवों का मांस गलकर मिल गया है। इनकी स्थिति दाह संस्कार करने वाली भी नहीं रह गई है। शवों पर चूना डालकर इन्हें गलाने की कोशिश की जा रही है। आपदा में मारे गए लोगों के दाह संस्कार को गई टीमें बारिश के बाद खुद मुसीबत में फंस गई हैं।
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बारिश से दाह संस्कार नहीं हो पा रहा है। महानिदेशक पुलिस सत्यव्रत ने बताया कि शनिवार को बारिश के कारण कोई दाह संस्कार नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि केदारघाटी में अब तक 76 शवों को दाह संस्कार हो पाया।

शासन दावा तो सभी शवों के दाह संस्कार करवाने का कर रहा है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जिस गति से काम चल रहा है, सभी शवों का संस्कार संभव नहीं है। बहुत से शवों की ऐसी स्थिति है कि उन्हें उठाया भी नहीं जा सकता। उन पर चूना छिड़का जा रहा है। इससे सड़ रहा मांस गल जाएगा। चूने के प्रभाव से शवों के कीड़े और कीटाणु दोनों मर जाएंगे।
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