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संस्थान में लंबे समय से प्रोफेसर व निदेशक नहीं

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हाइड्रो पावर के क्षेत्र में बीटेक की शिक्षा देने वाले टीएचडीसी हाइड्रो पावर प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी संस्थान कठिन दौर से गुजर रहा है। संस्थान में ढाई साल से स्थायी निदेशक नहीं है, जबकि तीन साल पहले 28 प्रोफेसर, एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसरों के पदों पर निकाली भर्ती भी अधर में लटकी हुई है।
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टीएचडीसी आईएचईटी भागीरथीपुरम में सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रीकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर साइंस में बीटेक की कक्षाएं संचालित है। संस्थान की सभी पांचों ब्रांचों में करीब 12 सौ से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत है, लेकिन लंबे समय से संस्थान में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर समेत ढाई साल से निदेशक नहीं है। वर्ष 2018 में करीब 28 प्रोफेसरों के पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे। बड़ी संख्या में युवाओं ने आवेदन किए थे, लेकिन तीन साल बाद भी चयन प्रक्रिया नहीं हो पाई है। सरकार ने 2018 से 20 तक तो गोपेश्वर इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक को चार्ज दिया, लेकिन वर्तमान में जिलाधिकारी को निदेशक का दायित्व सौंपा है। ऐसे में प्रभारी निदेशक संस्थान को ज्यादा समय नहीं दे पाते हैं। जबकि प्रोफेसरों की स्थायी नियुक्तियां न होने से छात्र-छात्राओं का पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है।
तकनीकी विवि का दायित्व केवल टीएचडीसी हाइड्रो संस्थान का एफिलिएशन, परीक्षा करवाना और रिजल्ट जारी करने का है। नियुक्ति से संबंधित काम शासन के अधीन है। संस्थान की समस्या से शासन को अवगत कराया जाएगा।
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-डा. पीपी ध्यानी, प्रभारी कुलपति, उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय।
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