जिले में टेली मेडिसिन सेवा 555 को इलाज की दरकार है। बजट के अभाव में उपकरणों की मरम्मत नहीं होने से यह सेवा डेढ़ साल से ठप पड़ी है। इससे दूर-दराज क्षेत्र के मरीजों को इस सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। गैर सरकारी सेवा होने के कारण 555 को शुरू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की निगाहें टीएचडीसी पर टिकी हुई हैं।
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का खासा अभाव है। मरीजों की सुविधा के लिए वर्ष 2017 में जिला अस्पताल बौराड़ी में टेलीमेडिसिन सेवा 555 शुरू की गई थी। इसके सेवा केंद्र से जिले के 30 स्वास्थ्य उपकेंद्रों को जोड़ा गया था। शुरूआती दो-तीन साल में उपकेंद्रों में डाक्टर नहीं होने की स्थिति में वहां तैनात फार्मासिस्ट सेवा केंद्र में तैनात डाक्टर से मरीजों का संवाद कराने के बाद दवा दे देते थे। लेकिन टेलीमेडिसिन सेवा का संचालन कर रही कॉम्परेक्स कंपनी को बजट नहीं मिल पाया। मार्च 2020 से सेवा का संचालन नहीं हो पा रहा है। सेवा केंद्र में तीन डाक्टर तो कार्यरत हैं, लेकिन उपकरणों का रखरखाव नहीं होने के कारण चार-पांच स्वास्थ्य उप केंद्र ही सेवा केंद्र से जुड़े हैं। ऐसे में दूर-दराज क्षेत्र के मरीजों को स्थानीय स्तर पर चिकित्सीय सलाह नहीं मिलने के कारण जिला अस्पताल और ऋषिकेश-देहरादून के अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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टेलीमेडिसिन सेवा 555 बाहरी वित्तीय सहायता से संचालित की जा रही थी। सेवा को बहाल रखने के लिए 40 लाख रुपये की जरूरत है। इसके लिए टीएचडीसी को पत्र भेजा गया है। बजट मिलने पर ही सेवा को बहाल किया जा सकता है। - डा. संजय जैन, सीएमओ नई टिहरी।
टेलीमेडिसिन सेवा के लिए बजट के संबंध में स्वास्थ्य विभाग से अभी कोई पत्र नहीं मिला है। विभाग ने सीएसआर मद से डिमांड की है तो पत्र मिलते ही जल्द कार्रवाई की जाएगी। -यूके सक्सेना, अधिशासी निदेशक टीएचडीसी भागीरथीपुरम।