टिहरी झील को विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य बनाने की सरकार की मुहिम दो साल से धरातल पर नहीं उतर पाई है। झील क्षेत्र के चारों ओर रिंग रोड बनाने के लिए फाइनल डीपीआर तैयार न होने के कारण केंद्र सरकार से बजट नहीं मिल पाया है।
केंद्र सरकार ने पूर्व में टिहरी झील को पर्यटकों की पहली पसंद बनाने के लिए इसके चारों ओर रिंग रोड बनाने के लिए वर्ष 2019 में सैद्धांतिक स्वीकृति देकर डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) भेजने के निर्देश दिए थे। लोनिवि ने बमुश्किल 2021 में प्रथम चरण की डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी थी, लेकिन इसमें कई कमियां होने के कारण मंजूरी नहीं मिल पाई। इसके बाद उत्तराखंड पर्यटन परिषद ने विस्तृत डीपीआर तैयार करने के लिए एक निजी कंसलटेंस को काम दिया। बावजूद अभी तक डीपीआर तैयार नहीं हो पाई।
रिंग रोड से टिहरी डैम होते हुए टिपरी से चाह गडोलिया, पिलखी, घनसाली, सेंदुल से पिपोला तक 66.4 किमी सड़क का विस्तारीकरण किया जा सकता था, जबकि पिपोला से घोंटी पुल होते हुए म्यूड़ा तक 16 किमी नई सड़क बननी थी। म्यूड़ा से पिपलडाली पुल तक आठ किमी, पुल से सांदणा बैंड तक 14 किमी, बैंड से रौलाकोट 12 किमी, डोबरा से मोटर बैंड नौ किमी, मोटणा से मदननेगी, मोटणा से चौंदार-तीन-तीन किमी, चौंदार बैंड से स्यांसू 14 किमी, स्यांसूृ से मणीदेवीधार 28.2 किमी, नकोट से स्यांसू आठ किमी, स्यांसू से स्यांसू पुल तक तीन किमी, स्यांसू से डोबरा जाख तक 23.6 किमी, डोबरा से कोटी कालोनी पांच किमी और कोटी से टिहरी डैम तक चार किमी सड़क का निर्माण और विस्तारीकरण किया जाना है। छह मीटर चौड़ी डबल लेन रिंग रोड के एक किनारे 150 मीटर का पैदल फुटपाथ, 150 मीटर का साइकिल ट्रेक, सड़क के बीच में छह मीटर चौड़ी ग्रीन बेल्ट बनाई जाएगी। घनसाली, सेंदुल, जलकुर और भौंगा में 36-36 मीटर स्पान के पुल बनेंगे। साथ ही पेट्रोल पंप, पार्किंग, होटल, ढाबे, व्यू प्वाइंट, शौचालय समेत सुविधाएं भी विकसित की जानी थी।
प्रथम चरण की डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी थी, लेकिन अब जानकारी में आया है कि सरकार ने रिंग रोड से संबंधित डीपीआर तैयार करने को एक निजी कंसलटेंस को जिम्मेदारी दी है।
-केएस नेगी, ईई, लोनिवि बौराड़ी।