टिहरी झील का जलस्तर बढ़ने से कुमराड़ा गांव के आवासीय भवन होने लगे जलमग्न।
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टिहरी बांध की झील का जलस्तर आरएल (रिवर लेबल) 830 मीटर तक भरने से कुमराड़ा निवासी विद्या सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उसके मकान का भूतल पूरी तरह से पानी में डूब गया है। लेकिन भवन का मुआवजा नहीं मिलने से परिवार वाले पानी वाले मकान में रहने को मजबूर हैं।
चिन्यालीसौड़ ब्लाक के ग्राम कुमराड़ा निवासी विद्या सिंह ने डीएम को दिए ज्ञापन में बताया कि चार पीढ़ी पहले उनके पूर्वज गांव में बसे थे, उस समय जिस जमीन पर मकान बनाया उसकी रजिस्ट्री नहीं हो पाई थी। जिससे जमीन का मुआवजा तो भूस्वामी को मिला, लेकिन उसे मकान का प्रतिकर नहीं मिल पाया है। अब झील का पानी मकान के भूतल तक पहुंच गया है, लेकिन दूसरी जगह कोई ठिकाना नहीं होने से वह परिवार के साथ पानी में डूबे मकान में रहने को मजबूर है।
जिला पंचायत सदस्य जयवीर सिंह रावत ने बताया कि क्षेत्र में इस तरह के कई मामले हैं, जिससे लोगों को जान जोखिम में डालकर रहना पड़ रहा है। टिहरी बांध की झील का जलस्तर आरएल 830 मीटर तक भरने से कई लोग इस तरह की दिक्कतों से जूझ रहे हैं। समस्याओं के निराकरण के लिए फिर से सर्वे करने की जरूरत है। इस बाबत अवस्थापना खंड पुनर्वास के ईई धीरेंद्र नेगी ने कहा कि आरएल 835 मीटर तक के सभी मामलों का निस्तारण कर दिया गया है। उन्हें भवन प्रतिकर नहीं मिला है, तो साक्ष्य प्रस्तुत कर सकते हैं। उसके बाद ही कोई कार्रवाई की जा सकेगी।