जिले के आपदा प्रभावित तीन गांव के 30 परिवारों के पुनर्वास को सरकार ने स्वीकृति दे दी है, लेकिन वर्ष 2011 की आपदा में सबसे ज्यादा प्रभावित हुए डौंर गांव को लेकर प्रभावित ग्रामीणों और प्रशासन के बीच सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में डौंर गांव के लोगों का पुनर्वास नहीं हो पा रहा है। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील तीन और गांवों का भू-गर्भीय सर्वे भी प्रशासन जल्द करवाएगा। सर्वे रिपोर्ट के बाद पुनर्वास को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
जिले में अलग-अलग वर्षों में आई आपदा के कारण एक दर्जन से अधिक गांव प्रभावित हुए थे, जिनमें से करीब आठ गांव में रहने वाले परिवारों को सरकार ने नकद मुआवजा देकर पुनर्वास का निर्णय लिया था। इनमें से चार गांव के 311 परिवारों को प्रशासन ने 2018-19 और 2019-20 में चार-चार लाख 25 हजार रुपये की धनराशि देकर गांव के आसपास सुरक्षित स्थान भवन निर्माण के लिए दिए हैं, जबकि प्रतापगनर के बैथांणगांव के चार, हलेथ के पांच और टिहरी के पनैथगांव के 21 परिवारों के पुनर्वास के लिए सरकार ने धनराशि स्वीकृत की है, लेकिन वर्ष 2011 की आपदा में सबसे ज्यादा प्रभावित हुए नरेंद्रनगर तहसील के डौंर गांव के परिवारों के पुनर्वास को लेकर सहमति नहीं बन हुई है। डौंर गांव में आपदा से 161 से अधिक प्रभावित परिवार भू-गर्भीय सर्वे में संवेदनशील पाए गए हैं, जिनका पुनर्वास आसपास के क्षेत्र में किया जाना है। इसके लिए ग्रामीणों को अपनी सहमति देनी है, लेकिन अभी तक केवल 11 परिवारों ने ही सहमति दी है। इनमें से अधिकांश परिवार गांव से बाहर पुनर्वास की मांग कर रहे हैं, जिसको लेकर पेंच शासनस्तर पर फंसा हुआ है। इस वर्ष की आपदा में नरेंद्रगनगर के जंगलेथ, बेमर और बिजपुर में भी नुकसान हुआ है। अब प्रशासन इन तीनों गांव का भी भू-गर्भीय सर्वे करवानी की तैयारी में हैं। सर्वे रिपोर्ट मिलने के बाद गांव के पुनर्वास को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
अपर जिलाधिकारी रामजी शरण शर्मा का कहना है कि आपदा प्रभावित अधिकांश परिवारों को पुनर्वास के लिए धनराशि मुहैया करवा दी गई है। जो परिवार बचे हैं उनके प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। डौंर गांव के पुनर्वास को लेकर शासनस्तर पर वार्ता चल रही है।