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भू-धंसाव व भूस्खलन क्षेत्रों का वाडिया, सीबीआरआई करेंगे सर्वेक्षण : कोठियाल

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संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रप्रयाग। तुंगनाथ घाटी के भूस्खलन व भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्र का वाडिया व सीबीआरआई से भू-गर्भीय सर्वेक्षण कराया जाएगा। साथ ही ठोस सुरक्षा कार्य के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी। यहां पिछले दो महीने से भू-धंसाव व भूस्खलन हो रहा है। इससे मस्तूरा से उषाड़ा, ताला तक हालात दयनीय हो गई है। लोगों के घरों, गोशाला और खेतों में मोटी दरारें पड़ गई हैं। साथ ही कुंड-ऊखीमठ-चोपता-गोपेश्वर हाईवे भी जर्जर हो गया है।
यह बात मुख्यमंत्री के विशेष सलाहकार कर्नल अजय कोठियाल (सेनि.) ने कही। दो दिन पूर्व उन्होंने मस्तूरा से उषाड़ा-ताला तक भू-धंसाव व भूस्खलन जोन का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वहां कई प्रभावित लोगों से बातचीत भी की। यहां उन्होंने हाईवे सहित कई घरों, खेत, पैदल रास्तों का निरीक्षण कर स्थिति को जाना। उन्होंने जीआईसी दैड़ा के पैदल मार्ग के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
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कर्नल कोठियाल (सेनि) ने बताया कि तुंगनाथ घाटी पर्यटन और तीर्थाटन की दृष्टि से प्रदेश ही रहीं राष्ट्रीय स्तर पर विशेष स्थान रखती है। यहां तृतीय केदार तुंगनाथ के साथ ही विश्व प्रसिद्ध पर्यटक स्थल चोपता भी है। लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए लोगों को खासी दिक्कतें हो रही हैं। क्योंकि मस्तूरा से उषाड़ा-ताला तक पूरा क्षेत्र भू-धंसाव व भूस्खलन की जद में है।
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यहां कई फीट गहरी दरारें पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि प्रभवित क्षेत्र का तकनीक से सुधारीकरण किया जाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि वह, यहां के हालातों की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेंगे और वाडिया और सीबीआरआई से क्षेत्र का सर्वेक्षण कराने का आग्रह करेंगे। उन्होंने बताया कि जल्द ही वह पुन: क्षेत्र का जायजा लेंगे।
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