शिव-पार्वती की विवाह स्थली त्रियुगीनारायण में अस्पताल के लिए ग्रामीणों का आंदोलन 11वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों का कहना है कि मांगपूर्ति तक वे धरने पर डटे रहेंगे। उन्होंने ऊखीमठ तहसील प्रशासन पर आंदोलन की अनदेखी का आरोप लगाते हुए नारेबाजी भी की।
ग्राम प्रधान प्रियंका तिवारी, ममंद अध्यक्ष अनीता राणा और युमंद अध्यक्ष रजनीश गैरोला ने कहा कि शासन-प्रशासन ने अब तक उनकी सुध नहीं ली है। 50 किमी की दूरी पर स्थित तहसील मुख्यालय ऊखीमठ से अब तक एसडीएम व उनके अधीनस्थ कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे हैं। साथ ही सत्ताधारी दल के किसी भी पदाधिकारी ने आंदोलन की सुध नहीं ली है। इस ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से मांगपूर्ति तक आंदोलनरत रहने का निर्णय लिया है।
सामाजिक कार्यकर्ता दिवाकर गैरोला ने बताया कि अस्पताल के अभाव में ग्रामीणों को साधारण बुखार की दवा के लिए भी 13 से 28 किमी तक की दौड़ लगानी पड़ती है। गंभीर बीमार और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाने में उन्हें खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वर्ष 2019 तक यात्राकाल में स्वास्थ्य विभाग की एमआरपी (मेडिकल रिलीफ पोस्ट) संचालित होती थी। कोरोनाकाल के कारण पिछले साल से यह मामला भी लटका हुआ है। अब, अस्पताल के लिए आरपार की लड़ाई लड़ी जा रही है। आवश्यकता हुई तो इसी सप्ताह एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य सचिव और स्वास्थ्य मंत्री से भेंट करने देहरादून भी जाएगा। धरना देने वालों में प्रेम लाल भट्ट, शांति प्रसाद पुरोहित, गोविंदराम पुरोहित, मोहन लाल पुरोहित शिशुपाल भट्ट, महेश चंद्र, बीरेंद्र प्रसाद, गिरीश चंद्र, राम प्रसाद, ललिता देवी, विनीता देवी, रेशमा देवी, करिश्मा देवी शामिल थे।