बच्छणस्यूं पट्टी के 21 ग्राम पंचायतों के 24 हजार आबादी की लाइफ लाइन खांकरा-कांडई-खेड़ाखाल मोटर मार्ग हादसों को न्योता दे रहा है। मार्ग पर भूधंसाव जोन सक्रिय होने से जहां वाहनों के पलटने का खतरा बना है, जिससे सफर दुआओं के सहारे हो रहा है। 36 किमी लंबे मोटर मार्ग का अधिकांश हिस्से पर उखड़े डामर से गड्ढों की भरमार है। साथ ही क्षेत्र के अन्य संपर्क मोटर मार्ग भी बदहाली का रोना रो रहे हैं, जिसका खामियाजा क्षेत्रीय जनता भुगत रही है।
अस्सी के दशक में निर्मित खांकरा-कांडई-खेड़ाखाल-खिर्सू मोटर मार्ग लोनिवि रुद्रप्रयाग और पौड़ी डिवीजन के अधीन है। प्रांतीय खंड रुद्रप्रयाग के पास मार्ग का 22 किमी हिस्सा है, जो खांकरा से मोल्ठा तक है। स्थिति यह है कि कांडई में जहां मार्ग का दो सौ मीटर भूधंसाव से बदहाल है। वहीं, गहड़खाल से मोल्ठा के बीच भी मार्ग की स्थिति अच्छी नहीं है। नौखू के समीप मार्ग पर जानलेवा बनना है। ऊपर पहाड़ी से गिर रहे मलबे से सड़क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो रखी है, लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं है।
अगस्त्यमुनि ब्लॉक के कनिष्ठ प्रमुख शशि सिंह नेगी, दिनेश नेगी, प्रकाश सिंह रावत, सोहन सिंह, अमर सिंह रावत, जयवीर सिंह रौथाण का कहना है कि लोनिवि व प्रशासन को कई बार अवगत कराने के बाद भी मोटर मार्गों के सुधारीकरण के प्रयास नहीं हो रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय जनता भगवान भरोसे आवाजाही को मजबूर है। इधर, जिलाधिकारी मनुज गोयल ने बताया कि लोनिवि व अन्य कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से जल्द इन मोटर मार्गों को दुरुस्त किया जाएगा।
सड़क होती तो गर्भवती, बीमार को डंडी, पालकी से नहीं ढोते
ऊखीमठ। कालीमठ घाटी के जग्गी-बग्वान के 175 परिवार सड़क की आस में मीलों पैदल नाप रहे हैं। बीमार व गर्भवती को तीमारदार डंडी व पालकी से अस्पताल तक ढोने को मजबूर हैं। लेकिन शासन-प्रशासन व जनप्रतिनिधियों ने कभी सुध नहीं ली।
प्रधान प्रदीप राणा, सरपंच सूरज सिंह, उप प्रधान रेशमा रावत, विक्रम सिंह, महिला मंगल दल अध्यक्ष आशीष सिंह, महिला मंगल दल अध्यक्ष सीमा देवी आदि का कहना है कि राउंलेक और कालीमठ से ग्रामीणों को अपने घरों तक पहुंचने के लिए 4 से 5 किमी खड़ी चढ़ाई नापनी पड़ रही है। ऐसे में बुजुर्ग, बच्चों और महिलाओं को खासी दिक्कतें होती हैं। वहीं, बीमार और गर्भवती को डंडी से सड़क तक पहुंचाने के बाद पीएचसी ऊखीमठ या सीएचसी अगस्त्यमुनि ले जाना पड़ता है। बीते वर्ष जुलाई में गांव की पिंकी देवी चट्टान से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई थी। बीते 12 फरवरी को भी बीमार सुनीता देवी को ग्रामीणों ने कालीमठ से डंडी के सहारे पांच किमी खड़ी चढ़ाई तय कर घर तक पहुंचाया। 2017/18 में पीएमजीएसवाई ने मार्ग का निर्माण शुरू किया, लेकिन चार वर्ष में सिर्फ चार किमी निर्माण हो पाया है। इधर, पीएमजीएसवाई के ईई केएस सजवाण ने बताया कि भूस्खलन जोन के चलते मार्ग पर कार्य रोका गया था।