आने वाले वर्षों में केदारनाथ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मुनकटिया मंदिर भी आकर्षण का केंद्र होगा। देवस्थानम बोर्ड मंदिर के विकास की योजना बना रहा है। इसी स्थान पर भगवान शिव ने अपने पुत्र गणेश का सिर काट दिया था। यहां आज भी गणेश जी की सिर कटी मूर्ति विराजमान है।
रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राजमार्ग पर सोनप्रयाग से करीब दो किमी आगे मुनकटिया गांव है। गांव में सात परिवार रहते हैं। यहीं गणेश भगवान का प्राचीन मंदिर है। मंदिर में पूजा-अर्चना व देखरेख की जिम्मेदारी स्थानीय गोस्वामी परिवार के लोग निभाते हैं। ग्रामीण दीघार्यु प्रसाद गोस्वामी का कहना है सीमित संसाधनों से मंदिर की देखरेख की जा रही है। प्रशासन व देवस्थानम बोर्ड प्रयास करे तो केदारनाथ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर भी अहम पड़ाव बन सकता है। इससे कई लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा।
इधर, देवस्थानम बोर्ड ने प्राचीन मंदिर को तीर्थाटन से जोड़ने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। एक-दो वर्षों में मंदिर को देवस्थानम बोर्ड द्वारा अधिग्रहित कर जरूरी कार्य किए जाएंगे।
इनका कहना है --
मुनकटिया गणेश मंदिर के संरक्षण व संवर्धन के लिए उसका अधिग्रहण किया जाएगा। इसके लिए अभी प्रारंभिक स्तर पर विचार हो रहा है। सबकुछ ठीक रहा तो एक-दो वर्षो में सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी जाएंगी।
- एनपी जमलोकी, कार्यधिकारी देवस्थानम बोर्ड, ऊखीमठ।