आज इगास के पावन पर्व अलकनंदा व मंदाकिनी के संगम पर देव निषाणों व पांडव पश्वा के स्नान के साथ जखोली ब्लॉक के दरमोला गांव में पांडव नृत्य का विधि-विधान से शुभारंभ हो जाएगा। साथ ही पंचांग गणना से वाण निकालने की तिथि भी घोषित की जाएगी।
जखोली ब्लॉक के भरदार पट्टी का दरमोला गांव सदियों से परंपरा का निर्वहन कर रहा है। यहां प्रतिवर्ष इगास पर पांडव नृत्य का शुभारंभ होता है। शनिवार देर शाम को गांव से ढोल-दमाऊं की थाप पर देव निषाण व पांडव पश्वा अलकनंदा व मंदाकिनी के संगम रुद्रप्रयाग पहुंच गए हैं। यहां पर रातभर विशेष अनुष्ठान के साथ भगवान बदरी विशाल, लक्ष्मीनारायण, शंकरानाथ, नागराजा, चामुंडा देवी, हीत, भैरवनाथ के निषाण की पूजा-अर्चना की जाएगी। साथ ही धार्मिक परंपराओं का निर्वहन कर चारों प्रहर विशेष पूजा के साथ रात्रि जागरण में कीर्तन का आयोजन भी किया जाएगा। पांडव नृत्य समिति दरमोला के अध्यक्ष जसपाल पंवार व कोषाध्यक्ष राजेंद्र सिंह कप्रवाण ने बताया कि ग्रामीण सदियों से चली आ रही परंपरा का विधि-विधान से निर्वहन करते आ रहे हैं। पूर्वजों द्वारा बताए गए नियमों के तहत प्रतिवर्ष इगास पर पांडव नृत्य का आयोजन शुरू होता है। इस अनुष्ठान में गांव के सभी प्रवासियों के साथ ही ध्याणियों को भी आमंत्रित किया जाता है। इगास (एकादशी) पर देव निषाणों के साथ ही देव पश्वा और पांडवों के अस्त्र-शस्त्रों को गंगा स्नान कराया जाता है। मौके पर संगम तट पर वेद मंत्रोच्चारण के बीच पूजा-अर्चना के साथ पंचनाम देवताओं और पांडवों की आरती उतारी जाएगी। इसके बाद ढोल-दमाऊं व पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ देव निषाण व पश्वा दरमोला गांव पहुंचेंगे। यहां पर पांडव चौक में देव निषाण स्थापित किए जाएंगे। पुजारी कीर्तिराम डिमरी ने बताया कि पंचांग गणना के आधार पर वाण निकालने की तिथि घोषित की जाएगी। साथ ही पांडव नृत्य में होने वाली महाभारतकालीन घटनाओं के मंचन का दिन तय किया जाएगा।
पांडवों का क्षेत्र से विशेष संबंध
पांडवों का रुद्रप्रयाग, जखोली, तल्लानागपुर समेत केदारघाटी सहित क्षेत्र के अन्य कई गांवों से सीधा संबंध है। यहां ग्रामीणों द्वारा प्रतिवर्ष, तीसरे वर्ष, पांचवें, सातवें वर्ष के साथ ही समयानुसार गांव में पांडव नृत्य का आयोजन किया जाता है। यह अनुष्ठान 11 दिन से लेकर 45 दिन तक होता है। इसमें महाभारत पर आधारित घटनाओं का नृत्य व जागर गायन के माध्यम से मंचन होता है।
यह है मान्यता
महाभारत का युद्ध खत्म होने के बाद गुरु व वंश हत्या के पाप से मुक्त होने के लिए पांडव भगवान श्रीकृष्ण के सुझाव पर हिमालय दर्शन के लिए आए थे। इस दौरान वे जिन-जिन गांवों में पहुंचे, वहां उन्होंने अपने अस्त्र-शस्त्र, ग्रामीणों को सुरक्षित रखने को कहा। इस पर, ग्रामीणों ने पांडवों से वचन लिया कि वे उन्हें जब भी बुलाएं वे नर रूप में पश्वा पर अवतरित होकर उनके गांवों में जरूर पधारें।
योग पार्क बौराड़ी में होगा सामूहिक आयोजन
नई टिहरी। टिहरी जिले में इगास बग्वाल (बूढ़ी दिवाली) मनाने की तैयारियां जोरशोर से शुरू हो गईं। बौराड़ी में इगास बग्वाल (एकादशी दिवाली) रविवार को विभिन्न संगठनों की ओर से सामूहिक रूप से मनाई जाएगी। कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर बैठक में कई निर्णय लिए गए। शाम 4 बजे से योग पार्क, 7 डी चौराहा बौराड़ी में इगास का आयोजन होगा। सामाजिक कार्यकर्ता महीपाल सिंह नेगी ने बताया कि नागरिक मंच, राज्य आंदोलनकारी मंच, त्रिहरी, भारत स्वाभिमान, राज विद्या केंद्र, वन अधिकार आंदोलन, लेक व्यू रिजार्ट, एपीजी अब्दुल कलाम विचार मंच की ओर से इगास का आयोजन किया जा रहा है। इगास पर्व पर 111 दिए जलाए जाएंगे। बच्चे, महिलाएं और पुरुष भैले खेलेंगे। दाल की पकोड़ियां बनाई जाएंगी। वृक्षों की पूजा की जाएगी। ढोल मंडाण कार्यक्रम और कुमाऊंनी लोक गायक गोपाल भाई सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देंगे। बैठक में कमल सिंह महर, त्रिलोक रमोला, पुरुषोत्तम चौहान, देवेंद्र नौडियाल, जगजीत नेगी, कुलदीप पंवार, महावीर उनियाल, मुशर्रफ अली आदि उपस्थित थे। संवाद