स्कूल स्तर पर हिंदी को बढ़ावा देने के लिए सरकारें भी गंभीर नहीं हैं। माध्यमिक स्कूलों में हिंदी के शिक्षकों के तमाम पद रिक्त होने से छात्रों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। गढ़वाल मंडल के पांच जिलों में एलटी व प्रवक्ता संवर्ग में हिंदी विषय में 418 पद खाली पड़े हैं।
स्थित यह है कि आज भी कई स्कूलों में जूनियर स्तर के छात्र-छात्राओं को हिंदी पढ़ने और लिखने में दिक्कत होती है। अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे हिंदी के सामान्य शब्दों व अंकों का अर्थ भी नहीं समझ पा रहे हैं। दूसरी तरफ गढ़वाल में पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग जिले के 418 माध्यमिक विद्यालयों में लंबे समय से हिंदी विषय के शिक्षक नहीं हैं। रुद्रप्रयाग जिले में देखे तो एलटी संवर्ग में जीआईसी मक्कू, मनसूना, चमकोट, पीडा-धनपुर, हाईस्कूल पांडवथली व गैंठाणा में लंबे समय से पद रिक्त चल रहे हैं। जबकि प्रवक्ता संवर्ग में जीआईसी दैड़ा, मनसूना, पलद्वाड़ी, रांसी, टैठी, मणिुपर, मयकोटी, कोठगी, ग्वेफड़, कमसाल, कंडारा और खांकरा में लंबे समय से हिंदी के शिक्षक नहीं हैं। इन हालातों में यहां के बच्चे खुद ही हिंदी की पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में जहां उन्हें विषय की व्यवहारिक जानकारी नहीं मिल पा रही है। वहीं, व्याकरण का ज्ञान भी नहीं हो रहा है। शिक्षाविद् चंद्रशेखर पुरोहित का कहना है कि हिंदी के प्रति शासन, विभाग और अभिभावकों को गंभीर होना होगा, तभी नई पीढ़ी को उसके महत्व, उपयोगिता और राष्ट्रभाषा होने का मतलब समझ में आएगा।
एलटी व प्रवक्ता संवर्ग में हिंदी विषय में रिक्त पदों को भरने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्रवक्ता संवर्ग में लोक सेवा आयोग से नियुक्ति व पदोन्नति प्रक्रिया गतिमान है। जबकि एलटी संर्व में 125 पद सरप्लस हैं। जबकि 177 पदों पर सीधी भर्ती होनी है।
- महावीर सिंह बिष्ट, अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक, पौड़ी गढ़वाल