हिमवंत कवि व जिले के मालकोटी गांव निवासी चंद्र कुंवर बर्त्वाल को उनकी 74वीं पुण्यतिथि पर अपनों ने ही भुला दिया। जीआईसी अगस्त्यमुनि में स्थापित उनकी प्रतिमा पर किसी ने भी माल्यार्पण तक नहीं किया। यहां तक कि चंद्र कुंवर बर्त्वाल स्मृति शोध संस्थान ने भी चितेरे कवि को याद करना जरूरी नहीं समझा।
मंगलवार 14 सितंबर को कवि की 74वीं पुण्यतिथि थी। आज ही के दिन वर्ष 1947 में 28 वर्ष की आयु में कवि चंद्र कुंवर बर्त्वाल का निधन हो गया था। अपने अल्प जीवन में उन्होंने हिंदी साहित्य की भरपूर सेवा की। इस दौरान उन्होंने एक हजार से अधिक हिंदी रचनाएं लिखीं जिसमें विराट ज्योति, कंकड़-पत्थर, पयस्विनी, काफल, पाक्कू, जीतू, मेघ नंदिनी आदि शामिल हैं। अपनी बीमारी को भी उन्होंने अपनी रचनाओं में स्थान दिया लेकिन शासन, प्रशासन की उपेक्षा के बीच अब उन्हें अपनों ने भी भुला दिया है। चंद्र कुंवर बर्त्वाल शोध संस्थान अगस्त्यमुनि के अध्यक्ष हरीश गुसाईं ने बताया कि सभी पदाधिकारी व सदस्यों के अन्यत्र होने के कारण पुण्यतिथि पर कोई आयोजन नहीं हो पाया। जल्द ही एक संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।