18 साल पहले चने की दाल में प्रतिबंधित खेसारी दाल मिलाने पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम ने दुकानदार को दो साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामला जुलाई 2002 का है, तब विभाग की लैब उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुआ करती थी।
खाद्य सुरक्षा विभाग के तत्कालीन फूड इंस्पेक्टर चरण सिंह ने 24 जुलाई 2002 को मंगलौर के मेन बाजार में स्थित कुर्बान अली की परचून की दुकान पर छापा मारा था। यहां से उन्होंने चने की दाल का सैंपल लिया था। उस दौरान लैब लखनऊ में हुआ करती थी। इसलिए सैंपल जांच के लिए लखनऊ भेजा गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार चने की दाल में खेसारी दाल की मिलावट की पुष्टि हुई थी। सस्ती होने के चलते खेसारी दाल को बेचना प्रतिबंधित है।
ऐसे में चने की दाल में खेसारी दाल की मिलावट के चलते खाद्य सुरक्षा विभाग ने दुकानदार के खिलाफ केस दर्ज करया था। तभी से मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम की अदालत में विचाराधीन था। सुनवाई के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम ने दुकानदार कुर्बान अली को मिलावटी दाल बेचने का दोषी पाया। शासकीय अधिवक्ता और वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि दाल में मिलावट का दोषी पाए जाने पर न्यायालय ने दुकानदार को दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दस हजार रुपये आर्थिक दंड भी लगाया है। उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से मामले में अच्छी पैरवी की गई और प्रभावी दलीलें पेश की गईं।