प्रार्थना सभा के दौरान चर्च में बवाल के दो महीने बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला अल्पसंख्यक समुदाय पर हमले से जुड़ा होने और संवेदनशील होने के बावजूद पुलिस ने अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं की है। जबकि, दोनों पक्षों पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है। कार्रवाई के नाम पर पुलिस जांच करने की बात कहकर पल्ला झाड़ रही है। माना जा रहा है कि हाईप्रोफाइल होने के चलते पुलिस फूंक-फूंककर कदम रख रही है।
सोलानीपुरम स्थित चर्च में छह अक्तूबर की सुबह सैकड़ों लोगों ने धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए प्रार्थना सभा में मौजूद लोगों से मारपीट करते हुए तोड़फोड़ की थी। मारपीट में कुछ महिलाएं और पुरुष घायल हो गए थे। एक युवक को देहरादून रेफर करना पड़ा था। पुलिस ने चर्च की केयर टेकर की तहरीर पर भाजपा और विहिप के सात नेताओं को नामजद करते हुए ढाई सौ अज्ञात लोगों के खिलाफ मारपीट, तोड़फोड़, डकैती का मुकदमा दर्ज कर लिया था। मामले में दूसरे पक्ष की आदर्श नगर निवासी एक महिला ने तहरीर देकर चर्च से जुड़े लोगों पर दो-दो लाख रुपये और नौकरी का लालच देकर धर्मांतरण का दबाव बनाने का आरोप लगाया था। पुलिस ने महिला की तहरीर पर चर्च की केयर टेकर समेत दस लोगों पर मारपीट, डकैती, छेड़खानी और एससी-एसटी का मुकदमा दर्ज किया था।
बाद में पुलिस ने चर्च की ओर से भी भाजपाइयों पर एससी-एसटी की धारा बढ़ा दी थी। दोनों मुकदमों की जांच सीओ रुड़की विवेक कुमार कर रहे हैं। वहीं, दो महीने बाद भी पुलिस की ओर से कोई गिरफ्तारी न करना कई सवाल खड़े कर रही है। माना जा रहा है कि पुलिस कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती है। वजह, एक तरफ सत्ता पक्ष के लोग शामिल हैं तो दूसरी ओर चर्च के लोग। ऐसे में अगर पुलिस भाजपाइयों पर कार्रवाई करती है तो गाज गिरने का डर है। जबकि चर्च पक्ष के लोगों पर कार्रवाई हुई तो विपक्ष के हाथ पुलिस और सरकार को घेरने का मुद्दा मिल जाएगा। ऐसे में पुलिस मामले में फूंक फूंककर कदम रख रही है। साथ ही प्रकरण को मैनेज कराने की तरफ अधिक ध्यान दे रही है।
पूरे मामले पर संघ की भी थी नजर
चर्च में बवाल की गूंज दिल्ली तक पहुंची थी। बताया जा रहा है कि इस मामले में दिल्ली से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की ओर से कुछ सदस्यों को हरिद्वार भेजकर जांच कराई गई थी। संघ के सदस्य कई दिनों तक हरिद्वार में ही डेरा डाले रहे थे। इसके चलते पुलिस और प्रदेश सरकार पर अधिक दबाव बन गया था। हालांकि, संघ की ओर से मामले में क्या दिशा-निर्देश दिए गए हैं, इसकी तस्वीर उजागर नहीं हुई है।
‘पुलिस का एक ही जवाब, जांच चल रही है’
पीड़ित पक्ष के अनुसार, उसे नहीं पता चल रहा है कि मामले में पुलिस किस नतीजे पर पहुंची है और क्या कार्रवाई करेगी। पुलिस के पास जाते हैं तो एक ही जवाब मिलता है कि जांच चल रही है। चर्च की केयर टेकर साधना लांस की बेटी ईवा लांस का कहना है कि पुलिस कुछ नहीं कर रही है। बस यह कहती है कि जांच चल रही है। जबकि, उन पर हमला हुआ, जिसके सारे निशान मौजूद थे। इसके बावजूद अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं। हमसे जो भी जानकारी मांगी गई थी, वह पुलिस को दे दी गई है। अब पुलिस को त्वरित न्याय दिलाना चाहिए।
सीसीटीवी कैमरे और डीबीआर भी नहीं बची
चर्च की केयर टेकर साधना लांस की बेटी ईवा लांस कहती हैं कि हमलावरों ने सबसे पहले घर में लगे कैमरों को तोड़ा था ताकि कोई सबूत न रहे। यही नहीं, मारपीट के बाद हमलावरों ने डीबीआर भी उखाड़ ली और अपने साथ ले गए। उन्होंने बताया कि मोहल्ले के घरों के बाहर लगे कैमरों की फुटेज भी उन्हें नहीं मिल पाई है। ऐसे में पुलिस अब जांच को किस दिशा में ले जा रही है, इसका उन्हें कुछ पता नहीं चल रहा है।
भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश महामंत्री चौधरी धीर सिंह कहते हैं कि घटना से तीन दिन पहले ही वह गंगाराम अस्पताल से इलाज कराकर लौटे थे। उनका सीढ़ी चढ़कर मारपीट या तोड़फोड़ करने का कोई मतलब ही नहीं है। समाचार पत्रों के माध्यम से पता चला कि मुकदमे में उनका नाम भी लिखवाया गया है। जहां तक घटना का सवाल है तो हर आदमी को अपना धर्म मानने का अधिकार है। उसमें जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए।
दोनों पक्षों की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमों की विवेचना जारी है। तथ्यों का परीक्षण किया जा रहा है। विवेचना में जो भी तथ्य प्रकाश में आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-प्रमेंद्र डोबाल, एसपी देहात