डॉ. यादवेंद्र नाथ मेमोरियल ट्रस्ट एवं उद्घोष की ओर से ‘शिक्षा का नया सवेरा’ कार्यक्रम के तहत आयोजित वर्चुअल संवाद में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार की गतिविधियों पर विचार साझा किए गए। इस दौरान चयनित किए गए 337 नवाचारी शिक्षकों को टीचर्स अवार्ड से नवाजा गया।
सोमवार को शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित वर्चुअल संवाद में बतौर मुख्य अतिथि स्टेट काउंसिल फॉर रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) की पूर्व उपनिदेशक डॉ. पुष्पारानी वर्मा ने कहा कि सभी शिक्षकों में नवाचार की संभावनाएं मौजूद होती हैं, लेकिन औसत शिक्षक यह मानकर चलता है कि उसका काम पाठ्यक्रम पढ़ा देना और बच्चों को परीक्षा के लिए तैयार करना है। बच्चे की उत्सुकता का विकास शिक्षक न अपनी जिम्मेदारी समझता है और न स्कूल में ऐसी परिस्थितियां हैं, जिनमें वह इस जिम्मेदारी को निभा सके। फिर भी कुछ शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने प्रयोग, शोध और क्रियात्मक अनुसंधान पर आधारित नवाचार से शैक्षिक स्तर को रूपांतरित ही नहीं किया बल्कि शैक्षिक चिंतन से कर्म का चरित्र बदलने की कोशिश की है।
असंगठित कामगार सुरक्षा बोर्ड के सदस्य नितिन शर्मा ने कहा कि कोविड काल में शिक्षकों ने भी अविस्मरणीय भूमिका अदा की है। उन्होंने सभी चयनित शिक्षकों को टीचर्स आइकन अवार्ड की शुभकामनाएं दीं। उद्घोष समूह के संस्थापक सदस्य संजय वत्स और डॉ. रणवीर सिंह ने कार्यक्रम में नवाचारी शिक्षकों से नवाचार पर शिक्षकों से संवाद स्थापित कर एक-दूसरे से नवाचारी गतिविधियां साझा करने की अपील की। बताया कि इस वर्ष देशभर से 337 शिक्षकों को टीचर्स आइकन अवार्ड के लिए चुना गया है। इस मौके पर डॉ. प्रदीप गहलोत, राजीव कुमार शर्मा, हरपाल आर्य, सपना रानी, वैशाली, किरण सिंह, सिम्मी सिंह, अश्विन सोलंकी, डॉ. राधा वाल्मीकि, किरण सिंह, सरिता रस्तोगी, सतीश प्रजापति, रविराज सैनी, बीना कौशल मौजूद रहे।