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... तो सीएम की चिट्ठी से पहले नहीं खुलेगी अफसर-नेताओं की नींद

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सीएम साहब की चिट्ठी जब अफसरों की टेबल पर पहुंचेगी तभी उनकी नींद टूटेगी। नेताओं और अफसरों से मोहभंग होने के बाद शायद यही आस लिए लोगों को सीएम दरबार में गुहार लगानी पड़ रही है। पिछले कुछ महीने में यह सिलसिला तेज हुआ है। खास बात यह है कि लोग गलियों और सड़कों पर होने वाले जलभराव जैसी समस्याओं से निजात तक के लिए सीएम से गुहार लगा रहे हैं। सीएम से मुलाकातों का यह सिलसिला स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान खड़ा कर रहा है।
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रुड़की के अलावा आसपास के क्षेत्र भगवानपुर, पिरान कलियर, मंगलौर, लक्सर, लंढौरा आदि क्षेत्रों से आए दिन लोग सीएम पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर रहे हैं। इसके लिए भी उन्हें कई तरह की पैंतरेबाजी अपनानी पड़ रही है। मुलाकात के बाद भले ही सीएम दरबार से फिलहाल सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा हो, लेकिन एक आस जरूर है कि सीएम ऑफिस से चलने वाली उनकी शिकायतों की चिट्ठी अधिकारियों की आंख-कान जरूर खोलेगी। ग्रामीण बड़े मुद्दों के साथ ही छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए भी सीएम से गुहार लगा रहे हैं। इनमें देहात क्षेत्रों में शिक्षण संस्थानों की स्थापना, ओवरलोड बिजली ट्रांसफार्मरों की समस्या, जलनिकासी के लिए नाले-नालियों के निर्माण आदि शामिल है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधि और अधिकारियों के बड़े अमले से लोगों का विश्वास दरक रहा है। सीएम दरबार पहुंचने वाले लोग बताते हैं कि स्थानीय स्तर पर अधिकारी और नेता कुछ करने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में जब तक सीएम स्तर से आदेश नहीं होते, समाधान की उम्मीद नहीं है। संवाद
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आखिर कब खत्म होगा ढंढेरावासियों का इंतजार
ढंढेरा और मोहनपुरा में जलभराव की समस्या आजादी के बाद से अब तक ज्यों की त्यों है। मोहनपुरा में बरसात के चार महीनों में हजारों लोग नारकीय जीवन जीते हैं। यहां जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से तालाब का पानी उलटा लोगों के घरों में घुस जाता है। इसी तरह ढंढेरा की एक गली में भी पानी की निकासी के लिए पर्याप्त नाले-नालियां नहीं बनाई गई हैं। समस्या के समाधान के लिए लोगों की उम्मीद टूटती जा रही है।
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सीएम हेल्पलाइन पर लोग कर रहे ढेरों शिकायत
स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान नहीं होने से लोग सीएम हेल्पलाइन के जरिये भी ढेरों शिकायतें कर रहे हैं। सीएम हेल्पलाइन पर नगर निगम, तहसील प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, विकास विभाग से जुड़ी 100 से अधिक समस्याएं हर महीने दर्ज की जा रही हैं। इन शिकायतों के निस्तारण के बाद शिकायतकर्ता को सूचित किया जाता है, लेकिन अधिकांश मामलों में शिकायतकर्ता समाधान नहीं होने की जानकारी दे रहे हैं।
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केस एक : विगत पांच जुलाई को हकीमपुर तुर्रा के ग्रामीणों ने सीएम पुष्कर सिंह धामी से देहरादून में मुलाकात कर गांव की जलनिकासी की समस्या का समाधान कराने की मांग की। ग्रामीणों का कहना था कि बरसात का पानी उनके घरों में घुस रहा है, लेकिन कोई समाधान करने के लिए तैयार नहीं है।
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केस दो : आम लोगों को ही नहीं बल्कि भाजपा नेताओं को भी समस्याओं के समाधान के लिए सीएम दरबार जाना पड़ रहा है। विगत तीन जुलाई को भाजपा के जिला महामंत्री आदेश सैनी ने सीएम से मुलाकात कर इंडस्ट्रियल एरिया समेत सुभाषनगर, कृष्णानगर में जलनिकासी के इंतजाम कराने की मांग की।
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केस तीन : शांतरशाह के ग्रामीणों ने 22 जुलाई को सीएम से मुलाकात की और कहा कि सैनी समाज के एक कार्यक्रम में कोरोना गाइडलाइन के उल्लंघन को लेकर गलत मुकदमा दर्ज कराया गया है। अधिकारियों से मुलाकात के बाद भी कोई सुनने को तैयार नहीं है। ग्रामीणों ने केस वापसी की मांग की।
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केस चार : औद्योगिक क्षेत्र में वर्षों से उद्यमी जलनिकासी के इंतजाम की मांग कर रहे हैं। हाल ही में डीएम ने भी उद्यमियों के साथ बैठक में दिशा निर्देश जारी किए, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। इसके बाद 17 जुलाई को रुड़की स्माल स्केल इंडस्ट्रीज के पदाधिकारियों ने सीएम से मुलाकात कर समस्या रखी।
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केस पांच : नौ जुलाई को उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी-शिक्षक संगठन का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिला और कर्मचारियों की समस्याएं रखीं। शिक्षकों का कहना था कि लंबित समस्याओं को लेकर विभिन्न स्तरों पर ज्ञापन और शिकायती पत्र दिए जा रहे हैं, लेकिन समस्याओं पर विचार नहीं हो रहा है।
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