कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति बदहाल है। सीएचसी में मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। इस कारण उन्हें निजी अस्पतालों में इलाज करवाना पड़ रहा है।
सीएचसी मंगलौर सुविधाओं के अभाव में रेफर सेंटर बनकर रह गया है। क्षेत्रीय विधायक काजी निजामुद्दीन के प्रयासों से पीएचसी को सीएचसी का दर्जा दिया गया था। सीएचसी का दर्जा मिलने के बाद लोगों को उम्मीद जगी थी की अस्पताल में उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलेंगी लेकिन स्वास्थ्य महकमा मंगलौर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा देकर सुविधाएं देना भूल गया है। सीएचसी में मानक के अनुसार न तो स्टाफ है और न ही सुविधाएं मिल रही हैं। केंद्र में कुल पद 29 हैं। इसमें से 11 पद खाली पड़े हुए हैं। करीब डेढ़ वर्ष से अधीक्षक का पद भी अस्थायी चल रहा है। सीएचसी में फिजिशियन का एक पद है लेकिन खाली है। इसके अलावा सर्जन, आर्थोपेडिक सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, निश्चेतक, रेडियोलॉजिस्ट, दंत चिकित्सक, चिकित्सा अधिकारी कम्युनिटी हेल्थ के एक-एक पद हैं जो खाली चल रहे हैं। वहीं वाहन चालक व चतुर्थ श्रेणी और स्वच्छता कर्मी के भी एक-एक पद खाली हैं। सीआर सिस्टम नहीं होने के कारण एक्स रे मशीन धूल फांक रही हैं। वहीं एंबुलेंस की सुध लेने वाला भी कोई नहीं है। वहीं अस्पताल प्रबंधक विपिन कुमार का कहना है कि सुविधाओं की बाबत सूची बनाकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उपलब्ध कराई गई है। उम्मीद है जल्द ही मंगलौर से सीएचसी में सुविधाएं उपलब्ध हो जाएं और मरीजों को इधर-उधर न भटकना पड़े।
ओपीडी में तीसरे नंबर पर है मंगलौर की सीएचसी
मंगलौर सीएचसी में प्रतिदिन 200 से अधिक लोग ओपीडी में पहुंचते हैं। ये जिले में तीसरे नंबर पर है। इससे अधिक जिला अस्पताल व रुड़की में ओपीडी होती है। वहीं डिलीवरी के मामले में भी मंगलौर सीएचसी सबसे आगे हैं। जिला महिला अस्पताल के बाद मंगलौर सीएचसी में सबसे ज्यादा प्रसव होते हैं। यहां साल में 2000 से अधिक डिलीवरी की जाती हैं।
विधायक निधि से बना वार्ड फांक रहा धूल
कोविड काल में जिला योजना से अलग से एक वार्ड बनाया गया था। इसमें विधायक निधि से सामान उपलब्ध कराया गया था, लेकिन वार्ड का काम पूरा नहीं होने के कारण सामान धूल फांक रहा है। इससे कोरोना की तीसरी लहर की संभावनाओं की तैयारियों को पलीता लग रहा है। सुविधाओं के अभाव में मंगलौर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डिलीवरी व रेफर सेंटर बनकर रह गया है।