प्रतिष्ठित भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने लगातार दूसरे वर्ष आईआईटी रुड़की को औद्योगिक नवाचार पुरस्कारों के लिए चुना है। इस साल मोस्ट इनोवेटिव रिसर्च इंस्टीट्यूशंस कैटिगरी में संस्थान को पहला स्थान मिला है। वहीं, आईआईटी मद्रास और इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इन्फार्मेशन सर्विसेज, हैदराबाद क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। पिछले साल भी आईआईटी रुड़की को ‘द मोस्ट इनोवेटिव इंस्टीट्यूट ऑफ द ईयर’ चुना गया था।
शनिवार को 27वें डीएसटी-सीआईआई प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन में डिप्टी सचिव, डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी भारत सरकार डॉ. श्रीवरी चंद्रशेखर और सीआईआई के पूर्व अध्यक्ष एवं सीआईआई इंडस्ट्रियल इनोवेशन अवार्ड्स के अध्यक्ष क्रिस गोपालकृष्णन ने पुरस्कारों की घोषणा की। आईआईटी रुड़की को संस्थागत रणनीतियों, अनुसंधान गहराई, नवाचार पोर्टफोलियो, उद्योग-अकादमिक साझेदारी, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, सामाजिक प्रभाव के आधार पर औद्योगिक नवाचार में पहला पुरस्कार मिला। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में डीएसटी सचिव डॉ. श्रीवरी चंद्रशेखर ने विजेताओं और अन्य प्रतिभागियों को नवाचार के लिए बधाई दी। साथ ही उद्योगों में क्रांति लाने के लिए नवाचार ढांचे का पोषण जारी रखने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि भारत अब भी एक कृषि प्रधान देश है और कुल भारतीय जनसंख्या का 65% कृषि क्षेत्र पर निर्भर है। इसलिए हमें लोगों के बेहतर जीवन और स्वास्थ्य के लिए नवीन समाधान लाने की आवश्यकता है। नवाचारों को सफल बनाने के लिए, उद्योग को नवाचार को संभालना और पोषित करना होगा। क्रिस गोपालकृष्णन ने कहा कि उद्यमिता के साथ नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता पर ध्यान केंद्रित करना हमारे 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने की कुंजी है। संस्थान निदेशक प्रो. अजीत के चतुर्वेदी ने कहा कि लगातार दो बार सीआईआई से औद्योगिक नवाचार पुरस्कार मिलना गर्व की बात है। आईआईटी रुड़की एक ऐसा माहौल और पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करता है, जो अपने छात्रों और शिक्षकों को अकादमिक शोध के अलावा औद्योगिक नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करता है। बता दें कि नवीन भारतीय उद्यमों की पहचान करने और उन्हें अमल में लाने के लिए वर्ष 2014 में सीआईआई इंडस्ट्रियल इनोवेशन अवार्ड्स की शुरुआत की गई थी।