राजकीय प्राथमिक विद्यालय परिसर में चल रहे जीजीआईसी की छात्राओं को जल्द छत नसीब होने की उम्मीद जगी है। कक्षाएं नहीं होने के चलते अभी छात्राओं को बाहर धूप में बैठकर पढ़ना पड़ता है। अमर उजाला ने छात्राओं की समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो शिक्षा निदेशक ने संज्ञान लिया और सीईओ को स्थिति जानने के निर्देश दिए। सीईओ के निर्देश पर उपखंड शिक्षाधिकारी ने स्कूल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने छात्राओं और स्कूल स्टाफ को आश्वासन दिया है कि जल्द किसी भी स्तर पर प्रयास कर छात्राओं के छत के नीचे बैठने की व्यवस्था की जाएगी।
रामपुर स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय परिसर में करीब सात साल से जीजीआईसी गुलाबशाहपीर रामपुर का संचालन किया जा रहा है। इस स्कूल को सरकारी कागजों में दर्जा तो दे दिया गया है लेकिन अभी तक खुद का भवन नहीं है। ऐसे में इसे राजकीय प्राथमिक विद्यालय में संचालित किया जा रहा है। अब जीजीआईसी में छात्राओं की संख्या 230 होने पर उन्हें कमरों में बैठाना मुश्किल हो रहा है। मजबूरी में छात्राओं को कड़ी धूप में बाहर प्रांगण में बैठाया जा रहा है। अमर उजाला ने छात्राओं की समस्या को 17 मार्च के अंक में ‘गर्मी में खुले आसमान के तले, छात्राओं की पढ़ाई कैसे चले’ शीर्षक से प्रकाशित किया था।
खबर के प्रकाशित होने के बाद मामले को शिक्षा निदेशक सीमा जौनसारी ने गंभीरता से लिया। उन्होंने हरिद्वार सीईओ शिव प्रसाद सेमवाल को जांच के निर्देश दिए। सोमवार को सीईओ के निर्देश पर उप खंड शिक्षा अधिकारी सावेद आलम जीजीआईसी की स्थिति देखने पहुंचे। यहां उन्होंने पाया कि कक्षाओं के अभाव में छात्राओं को स्कूल प्रांगण में बैठने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने स्थिति का जायजा लेकर छात्राओं और स्कूल स्टाफ को आश्वासन दिया कि जल्द ही उनकी समस्या का समाधान किया जाएगा। विभाग के साथ ही सामाजिक संस्थाओं से भी अपील की जाएगी कि वे स्कूल में कक्ष का निर्माण करें।