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फसलों का बीमा कराकर नुकसान से बचे बागवान

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पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत बागवान आम, लीची, मटर, आलू और टमाटर का बीमा करवाकर प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान से बच सकते हैं। बागवानों के पास आवेदन करने के लिए 31 दिसंबर तक का समय है। इसके लिए बागवान उद्यान विभाग कार्यालय में दस्तावेजों के साथ आवेदन कर सकते हैं।
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हर साल प्राकृतिक व अन्य आपदाओं के चलते बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। कई बार फसल शानदार खड़ी होने के बावजूद अंत में कुछ आपदा आने, समय से बारिश नहीं होने, ज्यादा बारिश होने और आग लग जाने आदि से किसानों की खड़ी फसल बर्बाद हो जाती है। बागवानों को इन आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई करवाने के लिए उद्यान विभाग फसलों का बीमा करवाता है। इस बार पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत बागवानों का बीमा करवाया जा रहा है। हालांकि इसके तहत बागवानों की चुनिंदा फसलें शामिल की गई हैं। इसमें आम, लीची, मटर, टमाटर और आलू को शामिल किया गया है।
यदि किन्हीं कारणों से इनमें नुकसान हो जाता है तो किसान इसकी शिकायत विभाग में कर सकते हैं। फसल को हुए नुकसान की जांच के बाद किसानों को मुआवजा राशि दी जाएगी। उद्यान अधिकारी राजेश प्रसाद जसोला ने बताया कि योजना के तहत किसान अपनी निर्धारित फसलों का बीमा करवा सकते हैं। साल में एक बार प्रीमियम देकर किसान अपनी फसलों को सुरक्षित कर सकते हैं। बताया कि कार्यालय में आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर है। आवेदन के साथ बागवान संबंधित जमीन के कागजात, आधार और फसल का ब्योरा जमा करेंगे। किसानों को आलू, मटर और टमाटर के लिए प्रति हेक्टेयर 3750 रुपये प्रीमियम देना होगा, जबकि आम और लीची के लिए प्रति पेड़ 25 से 50 रुपये का प्रीमियम देना होगा।
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