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गंभीर बीमारियों की रोकथाम में काम आती है पकड़ी गई नकली दवाएं

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क्षेत्र में छापे में पकड़ी गईं नकली दवाओं में से ज्यादातर एंटीबायोटिक हैं। इन्हें गंभीर बीमारियों और सामान्य रोगों को बढ़ने से रोकने के लिए दिए जाता है। यदि व्यक्ति लगातार नकली दवाओं का सेवन करता है तो उसकी बीमारी बढ़ने के कारण जान भी जा सकती है।
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पिछले दिनों एसटीएफ देहररदून ने रुड़की क्षेत्र में दबिश देकर बड़ी मात्रा में नकली दवाएं बरामद की थीं। इन दवाओं में ज्यादातर एंटीबायोटिक थीं। पकड़ी गई दवाओं में मेकोसेफ एलबी 200 के 99 डिब्बे, फिक्सिड एलबी 625 के 99 डिब्बे, मेकोसेफ एलबी ओ के 98 डिब्बे और मेकोपोड सीवी के 91 डिब्बे शामिल हैं। इसके अलावा पकड़े गए सामान में भारी मात्रा में बिना रेप की गई दवाएं, दवाओं में प्रयोग किया जाने वाला पाउडर, चार सिल्वर फॉयल के बंडल, 53 कट्टे कच्चा मैटेरियल 5 किलो दानेदार पीला पाउडर आदि भी बरामद किया गया था। जब इन दवाओं के बारे में चिकित्सकों से पड़ताल की गई तो पता चला कि इन दवाओं का इस्तेमाल भरपूर मात्रा में होता है। सबसे ज्यादा फिक्सिड एलबी 625 दवा का इस्तेमाल होता है। सिविल अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजय कंसल ने बताया कि ये पकड़ी गईं सभी दवाएं एंटीबायोटिक हैं। इन्हें रोग बढ़ने से रोकने के लिए दिया जाता है। यदि मरीज नकली दवाओं का सेवन करते हैं तो रोग बढ़ने पर जीवन पर भी संकट आ जाता है।
बिल मांगे और नकली दवाओं के सेवन से बचे
सीएमएस डॉ. संजय कंसल का कहना है कि आम व्यक्ति के लिए नकली दवाओं के पहचान का कोई तरीका नहीं है। हर व्यक्ति को दवा खरीदते समय बिल लेना चाहिए। बिलों के जरिए आने वाली दवाएं उचित स्रोत से प्राप्त होती है। वहीं ड्रग इंस्पेक्टर अनीता भारती का कहना है कि ज्यादातर देखने में आया है कि झोलाछाप डॉक्टर या ग्रामीण क्षेत्रों के मेडिकल स्टोरों पर नकली दवाओं के कारोबारी संपर्क करते हैं। ऐसे में अच्छे मेडिकल स्टोर और हास्पिटल से ही दवाएं लें और बिल की डिमांड जरूर करें।
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