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जैविक खेती के लिए मील का पत्थर बनेगा बजट

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बजट 2022 जैविक खेती के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। इस बजट में सरकार का पूरा फोकस जैविक खेती पर है। खास बात ये है कि प्रदेश में करीब छह हजार हेक्टेयर पर जैविक खेती हो रही है। इस बजट से जैविक खेती करने वाले किसानों को काफी मुनाफा होगा। साथ ही उन्हें जैविक खेती का बाजार भी उपलब्ध होगा।
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कुछ साल पहले हरिद्वार में जैविक खेती का रकबा काफी कम था। सरकार ने ग्रामीण इलाकों में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना अभियान शुरू किया। पहले चरण में खानपुर क्षेत्र में 500 कलस्टर में चयनित भूमि को जैविक खेती के लिए चुना। धीरे-धीरे जिले के अन्य इलाकों में खासतौर पर झबरेड़ा क्षेत्र में जैविक खेती का रकबा बढ़ा। वर्तमान में हरिद्वार में करीब छह हजार हेक्टेयर में जैविक खेती की जा रही है। वर्तमान में हरिद्वार जिले में करीब तीन हजार किसान जैविक खेती कर रहे हैं। वहीं मंगलवार को केंद्र के वित्त बजट में भी सरकार का पूरा फोकस जैविक खेती पर रहा। बजट में कृषि को रसायन मुक्त करने के लिए कई योजनाएं बनाई गई है। योजनाएं धरातल पर आएगी तो जैविक खेती में क्रांति आने की उम्मीद है। ।
उत्तराखंड में लागू है जैविक कृषि अधिनियम
प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए 2019 में जैविक कृषि अधिनियम भी लागू किया गया था। आंकड़ों के अनुसार उस समय जैविक कृषि का क्षेत्रफल 2.31 हेक्टेयर था जो कुल कृषि क्षेत्रफल का 36 प्रतिशत माना जाता है। सरकार की ओर से आर्गेनिक कलस्टर के माध्यम से परंपरागत फसलों के साथ फल व सब्जियों का जैविक तरीके से उत्पादन किया जा रहा है ताकि किसानों को उत्पाद का ज्यादा दाम मिल सके।
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इन फसलों की हो रही जैविक खेती
- धान
- गोभी
- टमाटर
- गन्ना
- गेहूं
- चना
- उड़द
- लैमनग्रास
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