पशुपालक अपने पशुओं के भरण-पोषण के लिए बैंक से लोन ले सकते हैं। इसके लिए पशु चिकित्सालय में आवेदन करना होगा। इसके आधार पर किसान क्रेडिट कार्ड की तर्ज पर पशुधन क्रेडिट कार्ड बनाए जा रहे हैं। एक किसान को उसके चार दुधारू पशुओं पर 1.60 लाख रुपये का लोन मिल सकता है।
हरिद्वार जिले में इस समय पशु विभाग में करीब चार लाख पशु दर्ज हैं। इसमें से करीब 1.75 लाख पशु दुधारू हैं। अक्सर देखने में आता है कि छोटे किसान पैसे के अभाव में दुधारू पशुओं का अच्छे से पालन-पोषण नहीं कर पाते। ऐसे में या तो किसान पशुपालन छोड़ देते हैं या फिर पशुुओं की संख्या सीमित कर देते हैं। किसानों को पशु पालन के लिए प्रेरित करने के लिए अब केंद्र सरकार ने पशुधन क्रेडिट कार्ड योजना शुरू की है। इसके तहत पशुपालकों के पशुधन क्रेडिट कार्ड बनाए जा रहे हैं।
किसान कार्ड बनवाने के लिए पशु विभाग में या सीधे बैंक में आवेदन कर सकते हैं। योजना के तहत किसान कम से कम चार दुधारू पशुओं पर प्रति पशु 35,500 रुपये बिना किसी औपचारिकता के बैंक से लोन ले सकते हैं। इससे ज्यादा लोन के लिए किसानों को सभी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. योगेश भारद्वाज ने बताया कि योजना के तहत किसान पशुओं का दाना खरीदने, गोशाला बनवाने, पुराल खरीदने या देखभाल से संबंधित किसी भी काम के लिए लोन ले सकते हैं। संवाद
एक साल में लोन जमा करने पर तीन फीसदी ब्याज की छूट
पशुधन क्रेडिट कार्ड के तहत मिलने वाले लोन पर सात प्रतिशत की दर से ब्याज लगता है। लोन को चुकाने के लिए कोई सीमा नहीं है। किसान दो से तीन साल तक भी लोन चुका सकते हैं, लेकिन यदि कोई किसान इस लोन को एक साल के अंदर चुका देता है तो विभाग उसे तीन फीसदी की सब्सिडी भी देगा। ऐसे में किसान को लोन केवल चार फीसदी की ब्याज दर पर मिल सकता है।
बैंक की टीम करेगी सर्वे
पशुपालक के आवेदन करने के बाद पशु विभाग आवेदन बैंक में भेज देगा। बैंक से पशुपालक का सत्यापन कराया जाएगा। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश भारद्वाज ने बताया कि योजना के तहत दुधारू पशुओं को ही शामिल किया जाएगा। ऐसे में सत्यापन इसलिए कराया जाता है ताकि पता चल सके कि पशुपालक के पास कितने पशु दुधारू हैं। यदि पशुपालक ने पशुओं की संख्या छह दर्ज की है और मौके पर केवल दो पशु ही दूध देते पाए गए तो उन्हीं के आधार पर कार्ड बनाया जाएगा।
पशुओं का बीमा कराकर करें आवेदन
वैसे तो आवेदन करते समय पशुओं का बीमा करवाना जरूरी नहीं होता, लेकिन बैंक में सत्यापन के दौरान अधिकारी पशुओं का बीमा मांगते हैं। क्योंकि, यदि किन्हीं कारणों से पशु की मौत हो जाए तो बैंक बीमा कंपनी से पशु पर लिए गए लोन की रकम वसूल सके।