रुड़की। आईआईटी रुड़की सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के भारतीय और जापानी खगोलविदों का साझा संगठन इंडियन पल्सर टाइमिंग ऐरे (इनपीटीए) टीम ने मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (यूजीएमआरटी) की मदद से रेडियो पल्सर में एक अभूतपूर्व बदलाव का पता लगाया है। इसी साल इनपीटीए को इंटरनेशनल पल्सर टाइमिंग ऐरे (आईपीटीए) कंसोर्शियम में शामिल किया गया।
वैज्ञानिकों के अनुसार ब्रह्मांड के मुख्य आकर्षणों में एक पल्सर (पल्सेटिंग रेडियो स्टार्स) बहुत घने मृत तारे हैं। प्रत्येक तारा एक घूर्णन पर रेडियो फ्लैश के साथ आकाशीय प्रकाश स्तंभ के रूप में दिखाई देता है। अपने आकार और अवधि में चमकते रेडियो सिग्नल या पल्स में बेजोड़ स्थिरता दिखाई देती है। उनके पल्स के स्थिर आकार को उनके फिंगरप्रिंट के रूप में देखा जाता है। यूजीएमआरटी की मदद से इनपीटीए नैनोहर्ट्ज (एनहर्टज) गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाने के लिए किसी एक पल्सर समूह का निरंतर अवलोकन करता है। ऐसे ही एक पल्सर समूह का अवलोकन करते समय अप्रैल और मई 2021 में इस तारे में फिंगरप्रिंट बदलने का मजबूत साक्ष्य मिले हैं। इससे इसकी लय और घड़ी के व्यवहार में बदलाव आया है। यूजीएमआरटी से मिलने वाले लो रेडियो फ्रीक्वेंसी अवलोकन से टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि इस घटना में जो परिवर्तन दिखा है, वह अभूतपूर्व बदलाव है। इनपीटीए टीम के अनुसार यह पल्सर के बाहरी हिस्से में बहुत ही मजबूत और जटिल चुंबकीय क्षेत्र बनने में बदलाव का प्रतीक है। इसके अतिरिक्त यूजीएमआरटी के अवलोकनों से यह जानने में भी मदद मिलेगी कि इस अप्रत्याशित घटना के पीछे के क्या रहस्य हैं। आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफेसर अजीत के चतुर्वेदी ने इस उपलब्धि पर कहा है कि हमारे छात्रों ने यूजीएमआरटी की मदद से इस क्षेत्र में बड़ा योगदान देकर हमारा मान बढ़ाया है। इस उपलब्धि पर आईआईटी रुड़की के पीएचडी छात्र जयखोम्बा सिंघा ने कहा है कि नैनोहर्ट्ज (एनएचजेड) गुरुत्वाकर्षण तरंगों को जानने की दिशा में यह नई खोज हमारे शोध की बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने इस प्रोजेक्ट पर देश-दुनिया के विभिन्न संस्थानों के खगोलविदों के साथ काम किया है। शोध पेपर में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले भौतिकी विभाग के छात्र पीयूष मरमत शामिल हैं।