डॉ. मुकेश बैरवा ने कहा कि कोरोनारोधी वैक्सीन की बूस्टर डोज से कोरोना सुरक्षा चक्र और मजूबत होगा। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शोध के अनुसार कोरोनारोधी वैक्सीन की बूस्टर डोज संक्रमण से बचाव में बेहद कारगर साबित होती है।
बूस्टर डोज से प्रतिरक्षित व्यक्ति के खून में नई एंटीबाडी बनती है। नई एंटीबाडी संक्रमण को रोकने में अधिक प्रभावी होती है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय फ्रंटलाइन वर्करों और बुजुर्गों को बूस्टर डोज देने की तैयारी कर रहे हैं। निर्धारित समय पर सभी लोगों तक बूस्टर डोज पहुंचेगी। बूस्टर डोज से प्रतिरक्षित होने के बाद हम कोरोना महामारी के खिलाफ और अधिक मजबूती से जंग लड़ पाएंगे।
सुई ही नहीं, इंट्राडर्मल और नेजल वैक्सीन भी प्रभावी
तीन जनवरी से 15 से 18 वर्ष के किशोरों का कोरानारोधी वैक्सीनेशन शुरू होने जा रहा है। बताया जा रहा है कि किशोरों को बिना सुई का प्रयोग करे वैक्सीन लगाई जाएगी। इसके लिए इंट्रा डर्मल वैक्सीन का प्रयोग किया जाएगा। फार्मा जेट एप्लीकेटर की मदद से वैक्सीन सीधा मांसपेशियों के अंदर पहुंचाई जाएगी। इसमें न दर्द होगा न इंफेक्शन की संभावना रहेगी।
वैक्सीनेटरों को इसके लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। अमूमन लोगों की धारणा होती है कि टैबलेट की जगह इंजेक्शन अधिक कारगर होते हैं। ऐसे में लोगों के मन में बिना सुई की वैक्सीन को लेकर संशय है। डॉ. मुकेश बैरवा ने बताया कि अब इंट्राडर्मल के साथ जल्द ही नेजल वैक्सीन का प्रयोग भी किया जा सकता है। ये दोनों वैक्सीन इंजेक्टेबल वैक्सीन की तरह असरदार और सुरक्षित हैं।