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जंक खा रही खुशियों की सवारी, जच्चा-बच्चा झेल रहे परेशानी

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एसपीएस राजकीय चिकित्सालय परिसर में बदहाल हालत में खड़ी खुशियों की सवारी। - फोटो : RISHIKESH
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ऋषिकेश। प्रसव के बाद सरकारी अस्पताल से जच्चा और बच्चा का घर तक का सफर अब खुशियों भरा नहीं रह गया है। एसपीएस अस्पताल में बारिश हो या तेज धूप प्रसूताएं नवजातों के साथ ईरिक्शा और ऑटो में घर जाने को मजबूर हैं। अस्पताल परिसर में खड़ी खुशियों की सवारी गाड़िया जंक खा रही है। जबकि कई अस्पताल अपने स्तर पर भी खुशियों की सवारी संचालन कर रहे हैं।
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राज्य में खुशियों की सवारी सेवा की शुरूआत 19 सिंतबर 2011 को की गई थी। पहले जीवीके 108 के साथ खुशियों का संचालन कर रही थी। लेकिन नई कंपनी से अनुबंध होने के बाद दो साल से भी अधिक समय से खुशियों की सवारी का संचालन बंद पड़ा है। इसका खमियाजा सरकारी अस्पताल से डिस्चार्ज होने वाली प्रसूताओं और नवजातों को भुगताना पड़ रहा है। कई जगह सरकार अस्पताल अपने खर्चें पर खुशियों की सवारी का संचालन भी कर रहे हैं। लेकिन ऋषिकेश में पिछले दो सालों से खुशियों की सवारी की दो गाड़ी अस्पताल परिसर में ही खड़ी। यहां तक इन गाड़ियों की देखरेख भी नहीं हो रही है। दोनों गाड़ियों के टायर पंचर होकर खराब हो चुके है। इन गाड़ियों में जंक भी लग रहा है।
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खुशियों की सवारी वाहन का संचालन उच्चस्तर पर ही होगा। उच्चाधिकारियों से आदेश मिलने के बाद वाहनों के संचालन को लेकर कार्यवाही की जाएगी।
- डॉ. विजयेश भारद्वाज, सीएमएस।
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