ऋषिकेश। श्यामपुर न्याय पंचायत की खदरी खड़क ग्राम सभा के 22 बीघा में जंगली जानवरों को गांव में घुसने से रोकने के लिए लगाई गई सौर ऊर्जा बाड़ का पांच सौ मीटर हिस्सा सौंग नदी में समा गया। अब बारिश में नदी के एक बार फिर उफान में आने के चलते खेतों के बहने के खतरा बना हुआ है। वहीं ग्रामीणों को जंगली जानवरों के साथ खेती की भूमि खोने का डर सता रहा है। ग्रामीणों ने सौंग नदी पर पक्का तटबंध न बनाने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
वन विभाग ने ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए ग्रामसभा के बाहर 2300 मीटर सौर ऊर्जा बाढ़ लगाई थी। लेकिन बुधवार को सौंग नदी पूरे उफान थी। इस दौरान सौर ऊर्जा बाढ़ का 500 मीटर हिस्सा नदी में बह गया। जिला गंगा सुरक्षा समिति के नामित सदस्य विनोद जुगलान का कहना है कि वर्ष 1998 में सौंग नदी में आई भीषण बाढ़ से खदरी के खादर क्षेत्र की लगभग 108 बीघा भूमि पहले ही नदी में समा चुकी है। यह भूमिधरि की वर्षों पुरानी भूमि थी। इसके बावजूद आज भी यहां पक्का तटबंध नहीं बन पाया है। जबकि यह मुद्दा उन्होंने जिला गंगा सुरक्षा समिति की बैठक में जिलाधिकारी के समक्ष उठाया था। लेकिन पक्के सुरक्षा तटबंध निर्माण की फाइल केंद्रीय जल आयोग में अंतिम चरण में लटकी हुई है। विनोद जुगलान ने कहा कि यदि राज्य के जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान देते हुए केंद्र में पैरवी करते तो ग्रामीणों को हर साल बारिश में सहमे हुए नहीं रहना पड़ता है। उन्होंने बताया कि जून में तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ.आशीष श्रीवास्तव ने सिंचाई विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि 15 जून तक सौंग नदी की बाढ़ से सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए जाएं। लेकिन रिवर ट्रेनिंग को छोड़कर कर बाकी तार जाल (वायर क्रेट्स) स्पर लगाने का कार्य वित्तीय अभाव के चलते नहीं हो सका। जिससे सौंग नदी का रुख खादर में 22 बीघा की ओर हो गया है। जिससे नदी ग्रामीणों के 55 वर्ष पुराने खेतों के समीप बह रही है। उन्होंने बताया कि सौंग नदी में यदि समय रहते यदि रिवर ट्रेनिंग का कार्य नहीं किया गया होता तो स्थिति यह होती किश गंगा जी का पहला उपजाऊ मैदान क्षेत्र खादर जलमग्न हो गया होता। ग्राम सभा खदरी के किसानों का कहना है कि यदि खादर की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध जल्द ही नहीं किये जाते हैं तो ग्रामीण आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। दिनेश जुगलान, परमा नंद भट्ट, रमेश भट्ट, राजेन्द्र रयाल, मदन रयाल, रोशन उपाध्याय, राजा राम रयाल, ओम प्रकाश रयाल, देव दत्त रयाल, राजेश शर्मा, देवेंद्र प्रसाद, चंद्र मोहन भट्ट, गौरव सेनानी लाखी राम रतूड़ी, पूर्व सैनिक राजा राम कुलियाल, खुशी राम, नरेंद्र प्रसाद रयाल, ऊषा जुगलान, बिंदेश्वरी देवी, विमला देवी, कमला देवी, बीना देवी, सुमति देवी, अषाढ़ी देवी आदि प्रमुख हैं।
बाढ़ सुररक्षा कार्यों के तहत रिवर ट्रेनिंग कार्य किया गया था। नदी का जलस्तर कम होने के साथ ही प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया जाएगा। बाढ़ सुरक्षा से जुड़े कार्य किए जाएंगे।
- दिनेश चंद्र उनियाल, सिंचाई विभाग उतराखंड
सौंग नदी का जलस्तर बढ़ने से सौर ऊर्जा बाड़ को भारी नुकसान पहुंचा है। हाथी से सुरक्षा के लिए खोदी गई खाई भी सौंग नदी समा गई है। सौर उर्जा बाड़ को जल्द ही ठीक करवाया जाएगा।
- एमएस रावत, वन क्षेत्राधिकारी
बाढ़ सुरक्षा के लिए सिंचाई मंत्री से मिले ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। गौहरीमाफी के ग्रामीणों का एक प्रतिनिधि मण्डल देहरादून में सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज से मिला। ग्रामीणों ने कहा कि गौहरीमाफी में सौंग नदी के उफान पर आने से हर साल बाढ़ आती है। बाढ़ के कारण स्थानीय लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। वहीं जान माल की क्षति पहुंचती है। ग्रामीणों ने सिंचाई मंत्री को बताया कि क्षेत्र में नौ करोड़ रुपये के बाढ़ सुरक्षा कार्य प्रस्तावित हैं। लेकिन शासन से योजना को वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल पाई है। जिसके चलते बाढ़ सुरक्षा कार्य अधर में लटके हुए है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर दोबारा बाढ़ आती है तो ग्रामीणों को फिर से नुकसान झेलना पड़ेगा। गौहरी माफी के ग्राम प्रधान रोहित नौटियाल ने बताया कि सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने कहा जल्द से जल्द से बाढ़ सुरक्षा कार्यों को स्वीकृति देने का आश्वासन दिया है। प्रतिनिधि मंडल में भाजपा श्यामपुर मंडल अध्यक्ष गणेश रावत, जिला सोशल मीडिया प्रभारी राजेश जुगलान, सुरेश नौटियाल आदि शामिल रहे।
खदरी क्षेत्र में सौंग नदी के जलस्तर बढ़ने से हुआ भू कटाव।- फोटो : RISHIKESH
खदरी क्षेत्र में सौंग नदी के जलस्तर बढ़ने से क्षतिग्रस्त हुई सौर ऊर्जा तारबाड़।- फोटो : RISHIKESH