फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रोडवेज डिपो को मिली 75 टच स्क्रीन ई-टिकटिंग मशीनें

विज्ञापन
17 रोडवेज डिपो में नई ई-टिकटिंग मशीनों की जांच करते रोडवेज कर्मचारी। - फोटो : RISHIKESH
विज्ञापन
रोडवेज डिपो के कंडक्टर की चार साल पुरानी मांग पूरी हो गई है। डिपो को रोडवेज मुख्यालय की ओर से 75 टच स्क्रीन ई-टिकटिंग मशीन मिल गई हैं। डिपो के एजीएम ने रूट पर जाने वाले कंडक्टर को मशीनें देकर भेजा है।
विज्ञापन

वर्ष 2014 में रोडवेज मुख्यालय की ओर से डिपो को ई-टिकटिंग मशीनें दी गई थी। 2017 में अधिकांश ई- टिकटिंग मशीनें जवाब दे गई थी। करीब चार साल से डिपो में ई- टिकटिंग मशीनों का टोटा हो गया था। चार साल से डिपो में ई-टिकटिंग मशीनों की कमी होने से बसों का संचालन भी प्रभावित हो रहा था। ई-टिकटिंग मशीनों की कमी के कारण दूसरा कंडक्टर रोड पर गए कंडक्टर का इंतजार करता था। जिन कंडक्टरों के पास ई-टिकटिंग मशीन नहीं होती थी, वह यात्रियों का मैनुअल टिकट बनाते थे, डिपो में आकर फिर मैनुअल बनाए गए कि टिकट को ई-टिकटिंग मशीन में फीडकर करने के बाद ही कैश जमा कराया जाता था। इससे कई बार टोटल पैसे में अंतर आ जाता था, कंडक्टर को बकाया राशि अपनी जेब से जमा करनी पड़ती थी। जिन कंडक्टर को मैन्युअल टिकट देकर रूटों पर भेजा जाता था वह बस में कम सवारियां बिठाते थे। इससे रोडवेज की आय भी प्रभावित हो रही थी। ई-टिकटिंग मशीनों की कमी से डिपो को हर रोज करीब डेढ़ लाख रुपए का नुकसान हो रहा था। एक साल से गई मुख्यालय में ई-टिकटिंग मशीनों की खरीद फरोख्त शुरू हुई थी। टेस्टिंग और सॉफ्टवेयर डालने के बाद मशीनें डिपो प्रबंधन के सुपुर्द की गई। नई ई-टिकटिंग टच स्क्रीन मशीन मिलने पर कंडक्टर काफी खुश नजर आए।
- डिपो को 75 टच ई-टिकटिंग मशीन मिल गई हैं। सभी मशीनों को रूट पर जाने वाले कंडक्टर को दिया गया है। ई- टिकटिंग मशीन मिलने के बाद डिपो की आय में भी वृद्धि होगी। - पीके भारती एजीएम रोडवेज डिपो ऋषिकेश
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें