देहरादून जौलीग्रांट एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के पहले चरण का 353 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा निर्माण कार्य अंतिम दौर में है। कार्य के अक्तूबर माह के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। निर्माण कार्य पूरा होने से एयरपोर्ट की क्षमताओं में आठ गुना बढ़ोतरी हो जाएगी।
राज्य में हवाई सेवाओं को विस्तार देते हुए देहरादून जौलीग्रांट एयरपोर्ट का योजनाबद्ध तरीके से विस्तार किया जा रहा है। इसके लिए पहले चरण में 353 करोड़ की लागत से यूटिलिटी ब्लॉक, पार्किंग, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, रेनवाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर और अन्य सहायक संरचनाओं के साथ डोमेस्टिक टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण किया जा रहा है। 42776 वर्ग मीटर के क्षेत्र के साथ नई टर्मिनल बिल्डिंग पीक आवर्स के दौरान 1800 यात्रियों को संभालने में सक्षम होगी। इससे हवाई अड्डे की क्षमता आठ गुना बढ़ जाएगी।
भवन में जांच, सुरक्षा और ग्रांउड फ्लोर पर आगमन लाउंज, पहली मंजिल पर सुरक्षा होल्ड, अन्य सेवाएं और कार्यालय होंगे। 36 चेक इन काउंटर और चार एयरोब्रिज से लैस, नए टर्मिनल में सभी आधुनिक सुविधाएं जैसे सेल्फ-कियोस्क और इनलाइन बैगेज स्क्रीनिंग सुविधा होगी। 6465 वर्ग मीटर का स्थान भी विकसित करने की योजना है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार और राजस्व के सृजन में मदद मिल सकेगी।
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उत्तराखंड की संस्कृति से रूबरू होंगे यात्री
एयरपोर्ट पर आवाजाही करने वाले यात्रियों और आगंतुकों को उत्तराखंड की संस्कृति और विरासत से रूबरू कराया जाएगा। भवन को राज्य की भावनाओं के अनुरूप डिजाइन किया गया है। इसमें धनुषाकार अग्रभाग वन अनुसंधान संस्थान देहरादून से प्रेरित है। वहीं, फीचर कॉलम उत्तराखंड के राज्य पुष्प ब्रह्मकमल के रूप में विकसित किया गया है। नए भवन में जल संचयन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, सौर ऊर्जा प्रणाली और रोशनदान के माध्यम से प्राकृतिक प्रकाश के प्रावधान के लिए डबल घुमावदार छत जैसी पर्यावरण के अनुकल टिकाऊ विशेषताएं हैं।
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विस्तारीकरण के दूसरे चरण में टर्मिनल बिल्डिंग से परिचालन, सभी सेवाओं के एकीकरण, टर्मिनल बिल्डिंग के बैलेंस हिस्से का निर्माण और अन्य कार्यों को पूरा कराना शामिल होगा। पहले चरण का विकास कार्य 80 प्रतिशत तक पूरा हो गया है। 21 अक्तूबर तक परियोजना का काम पूरा होने की उम्मीद है।
- डीके गौतम, एयरपोर्ट डायरेक्टर, जौलीग्रांट एयरपोर्ट