ऋषिकेश। 27 नवंबर को आईडीपीएल फैक्टरी की लीज खत्म हो जाएगी। लीज खत्म होने के बाद 834 एकड़ भूमि पर बनी आईडीपीएल फैक्टरी और अन्य परिक्षेत्र (वन विभाग) राज्य सरकार के अधीन हो जाएगा। फैक्टरी के 834 एकड़ भूमि में से 200 एकड़ भूमि एम्स को देने पर पहले ही सहमति बन चुकी है। वहीं वन विभाग ने भी भूूमि पर कब्जे लेने को लेकर तैयारियां शुरू कर दी है।
1962 में आईडीपीएल की फैक्टरी की आधार शिला रखी गई थी। 1965 में उत्पादन शुरू हुआ था। सोवियत रूस के सहयोग से बनी इस फैक्टरी में कई एंटीबॉयोटिक दवाइयों का उत्पादन होता था। फैक्टरी की स्थापना के बाद 2700 क्वार्टरों का निर्माण किया गया था। इसके अलावा दुकानें, शॉपिंग सेंटर, एक इंटरमीडिएट कॉलेज, एक केंद्रीय विद्यालय, एक डाकघर, पुलिस स्टेशन, खेल के मैदान और एक सामुदायिक केंद्र भी बनाया गया। लीज खत्म होने पर वन विभाग पहले आईडीपीएल को अपने अधीन लेने की बात कहा चुका है। आईडीपीएल फैक्टरी प्रशासन भी टाउनसीप में रहने वाले वीआरएस प्राप्त कर्मचारियों और परिजनों को सार्वजनिक नोटिस जारी कर चुका है।
45 साल पुरानी हाट भी हटेगी
आईडीपीएल प्रशासन की ओर से 1976 में कॉलोनी में रह रहे कर्मचारियों और उनके परिवारों को जरूरी सामान उपलब्ध कराने के लिए लवली स्टोर (फुटकर बाजार) के साथ ही सब्जी और अन्य उत्पादों के लिए सप्ताह में दो दिन हाट बाजार की अनुमति दी गई थी। वर्तमान में हाट बाजार में 200 व्यापारी स्थानीय और 150 व्यापारी बाहर हरिद्वार, रुड़की, लक्सर से अपने उत्पादों को बेचने के लिए आते हैं। अब आईडीपीएल की संपत्ति वन विभाग के अधीन होने पर दुुकानदारों के सामने रोजी रोटी का संकट मंडरा रहा है।
क्या कहते हैं हाट व्यापारी
- 27 नवंबर को आईडीपीएल की लीज खत्म हो रही है। ऐसे में आईडीपीएल में हाट बाजार लगने को लेकर भी संशय हो रहा है। राज्य सरकार को आईडीपीएल में 45 साल से साप्ताहिक दुकान लगाने वाले दुकानदारों को सूचीबद्ध कर उनके विस्थापन की व्यवस्था करनी चाहिए।
- दीपक कश्यप
यदि 27 नवंबर से आईडीपीएल को वन विभाग अपने अधीन करता है तो शायद ही दुकानें और अन्य काम होंगे। राज्य सरकार को चाहिए कि आईडीपीएल की जिस भूमि पर हाट लगती है उस भूमि को वैडिंग जोन घोषित कर वहां यहां दुकान लगाने वाले दुकानदारों को खोखा आवंटित किए जाएं।
- चंद्रशेखर
मैं खुद 35 साल से आईडीपीएल हाट बाजार में दुकान लगाता हूं। यदि लीज खत्म होने के बाद आईडीपीएल में हाट लगाना बंद होता है तो 350 व्यापारियों के सामने रोजी रोटी का संकट आ जाएगा। प्रदेश सरकार को आईडीपीएल हाट में दुकान लगाने वाले व्यापारियों के हित में कदम उठाने चाहिए। - जितेंद्र कुमार
40 हजार की आबादी को हटाना वन विभाग के सामने चुनौती
- लेबर कॉलोनी (कृष्णा नगर) में जहां-जहां मजदूरों की कच्ची झोपड़ियां होती थी वहां अब वहां ऑलीशान कोठियां बन गई हैं। कई प्रापटी डीलरों ने औने-पौने दाम पर जमीनें दूसरों को बेच दी है। विभिन्न दलों के नेताओं ने भी यहां अपनी कोठियां बना दी है। क्षेत्र की आबादी करीब 40 हजार तक पहुंच गई है। 27 नवंबर के बाद वन विभाग अपना कब्जा ले लेगा। ऐसे में इतनी बड़ी आबादी को यहां से बाहर करना चुनौती होगा।
एम्स को 200 एकड़ जमीन मिलने का रास्ता होगा साफ
- आईडीपीएल की 834 एकड़ भूमि में से करीब 200 एकड़ भूमि एम्स को दी जानी है। यह भूमि आईडीपीएल फैक्टरी के सामने से रोड के उस पार टेलीफोन एक्सचेंज, डाकघर, लवली स्टोर की साइड बापूग्राम सुमन विहार के सामने तक दी जानी है। अब लीज खत्म होने पर वन विभाग भूमि सीमांकन करेगा। भूमि एम्स के अधीन होगी।
सरकार पर दबाव बनाने के लिए धरना प्रदर्शनों का दौर शुरु
जनकल्याण संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से कृष्णा नगर कॉलोनी, खांड गांव और आईडीपीएल को नगर निगम ऋषिकेश में शामिल करने की मांग को लेकर त्रिवेणीघाट अनिश्चितकालीन धरना 39वें दिन जारी रहा। धरने का नेतृत्व कर रहे डॉ.बीएन तिवारी ने कहा कि जब तक मांग पूरी नहीं होती धरना जारी रहेगा। वहीं आईडीपीएल सिटी गेट प र आवासीय कल्याण समिति आईडीपीएल वीरभद्र की ओर से धरना शुरु कर दिया गया है। धरने का नेतृत्व कर रहे सुरेंद्र नेगी ने कहा कि जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जाती धरना जारी रहेगा।
27 नवंबर को आईडीपीएल फैक्टरी की लीज खत्म हो रही है। भूमि को वन विभाग के अधीन करने के लिए शासन में कार्रवाई चल रही है। वन विभाग की ओर से जल्द ही सर्वे और अन्य काम किया जाएगा।
- महेंद्र सिंह नेगी, रेंजर ऋषिकेश।