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जातिगत समीकरण ही बनेंगे तीन विधानसभाओं में जीत का आधार

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राजनीतिक दलों के प्रत्याशी विकास के दावों के साथ चुनावी मैदान में उतरने का दम भर रहे हैं, लेकिन धरातल पर यह दावे हवा हवाई साबित हो रहे हैं। यमकेश्वर, नरेंद्रनगर और ऋषिकेश में जातिगत समीकरण ही चुनावी रण और जीत का आधार बने हुए हैं। इससे प्रत्याशियों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
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यमकेश्वर विधानसभा सीट से भाजपा से रेणू बिष्ट, कांग्रेस से शैलेंद्र रावत और आप से अविरल बिष्ट मैदान हैं। यमकेश्वर क्षेत्र ठाकुर बाहुल्य क्षेत्र है, इसलिए तीनों दलों ने ठाकुर प्रत्याशी पर ही दांव खेला है। जाहिर सी बात है कि ठाकुर वोटर का मतदान प्रतिशत तीनों ही जगह विभाजित होगा। ऐसे में क्षेत्र में ब्राह्मण वोटरों के हाथों में प्रत्याशी की जीत की चाबी होगी। उधर, नरेंद्रनगर में कांग्रेस और आप ने ठाकुर प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में में उतारा है। कांग्रेस से राज्य आंदोलनकारी ओमगोपाल रावत और आप से पुष्पा रावत चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं भाजपा ब्राह्मण प्रत्याशी के तौर पर सुबोध उनियाल के चेहरे पर चुनावी रण में है। यहां भी ठाकुर वोटरों की संख्या अधिक है, इसलिए नरेंद्रनगर में भी ब्राह्मण वोटर ही निर्णायक भूमिका में होंगे। हालांकि क्षेत्र के ब्राह्मण वोटरों ने अभी तक प्रत्याशियों के सामने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। ऋषिकेश विधानसभा में स्थिति कुछ अलग है। यहां ठाकुर, ब्राह्मण और अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग की मिश्रित आबादी है। यही नहीं, ऋषिकेश में पंजाबी, पूर्वांचल और वैश्य समाज का भी बड़ा वोट बैंक है। ऋषिकेश में भाजपा प्रत्याशी प्रेमचंद अग्रवाल वैश्य समाज से आते हैं। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी जयेंद्र रमोला, आप प्रत्याशी डॉ. राजे सिंह नेगी और उजपा प्रत्याशी कनक धनै ठाकुर हैं। यहां ठाकुर वोटरों के मत का बंटवारा लगभग तय माना जा रहा है। ऐसी स्थिति में ब्राह्मण और वैश्य ही प्रत्याशी की जीत की सीढ़ी तैयार करेंगे।
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