इस बार बैसाखी का पुण्यकाल दोपहर 1.12 बजे से शुरू हो रहा है, जो कि दिनभर रहेगा। सूर्य का मेष राशि में प्रवेश शाम को 7.45 बजे होगा। बारह वर्ष बाद पुनर्वसु नक्षत्र, सुकर्मा योग, मिथुन राशिस्थ चंद्रमा कालीन तुला लग्न में सूर्य का मेष राशि में प्रवेश होने का योग बन रहा है। ठीक इसी तरह का योग 13 अप्रैल वर्ष 2004 को बना था। ज्योतिष इस योग को शुभ मान रहे हैं।
इस वर्ष चैत्र शुक्ल सप्तमी तिथि बुधवार के दिन (13 अप्रैल को) अर्द्धकुंभ का पुण्य योग बना रहा है। इस दिन गंगा का स्नान मुख्य पुण्यकाल सूर्योदय एवं अरुणोदय काल प्रात: 4.28 से प्रात: 5.56 बजे तक रहेगा।
साथ ही संक्रांति का विशेष पुण्य समय दोपहर एक बजकर बारह मिनट से प्रारंभ होगा। इसके बाद पूरे दिन भी स्नान-दान, पूजा आदि के लिए विशेष पुण्यप्रद रहेगा।
संक्रांति का राशियों पर असर
धनु, मकर, मेष, मिथुन एवं कर्क राशि वालों के लिए यह लाभप्रद रहेगा। अन्य राशि वाले जातकों के लिए संक्रांति का फल मिला-जुला रहेगा। इस दिन संध्या के समय संक्रांति प्रवेश होने से अल्प एवं खंड वर्षा के योग 14 मई तक हैं। आंधी के कारण खड़ी फसलों को हानि हो सकती है। बैसाखी के दिन बुधवार होने की वजह से वर्ष का मंत्री बुध होगा।
मंगल होगा वक्री
17 अप्रैल से 30 जून तक मंगल वक्री रहेगा। शनि पहले से वक्री चल रहा है। 13 अगस्त को शनि मार्गी होंगे। उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व उपाध्यक्ष आचार्य भरत राम तिवारी के अनुसार मंगल का वक्री होना देश की शांति को भंग करेगा। यान एवं वाहन दुर्घटना, आर्थिक हालात बेकाबू होंगे। यह योग 30 जून तक बना रहेगा।