प्रदेश में उपजे सियासी घमासान में अब पक्ष-विपक्ष अपनी-अपनी तरफ से वक्त के पहिए पर पकड़ बनाने की कोशिश में है। दोनों के लिए 28 मार्च की डेडलाइन है। सत्ता पक्ष इससे पहले बागी नौ विधायकों की सदस्यता समाप्त करने की कोशिश में है और विरोधी खेमा इस कोशिश को नाकाम करना चाहता है।
सरकार पर अविश्वास जता चुके कांग्रेस के बागी नौ विधायकों ने अब अदालत का दरवाजा खटखटा कर कानूनी लड़ाई का मोरचा भी खोल दिया है। यही वह बिंदु भी है जिस पर सरकार भी अपनी तरफ से कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती।
एक-एक दिन बीतने के साथ ही प्रदेश में सियासी घमासान नए-नए रूप में सामने आ रहा है। बृहस्पतिवार की होली का रंग अभी उतरा भी नहीं था कि शुक्रवार को कांग्रेस के नौ विधायकों ने दल बदल कानून के तहत जारी किए गए नोटिस के खिलाफ कानूनी मोरचा खोल दिया।
बागी खटखटाएंगे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
हरक सिंह सहित कांग्रेस के नौ विधायकों ने पहले हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखे।
हाईकोर्ट से बागी विधायकों को राहत भले ही न मिली हो, लेकिन माना यह भी जा रहा है कि इससे उनके लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की राह जरूर बन गई है।
इस स्थिति में अब सरकार को भी कानूनी मोरचे पर चाक चौबंद होना पड़ रहा है। हाईकोर्ट में सरकार की पैरवी में कांग्रेस ने कपिल सिब्बल को उतार कर यह संकेत तो दे ही दिया कि उनकी तरफ से कोई ढील नहीं दी जा रही है।